धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में आगामी त्योहारों के दौरान पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दीपावली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर लोग केवल निर्धारित समय के भीतर ही पटाखे फोड़ सकेंगे। इसके अलावा जिले में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की ही अनुमति होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पटाखे फोड़ने का समय निर्धारित

उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष हेमराज बैरवा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। निर्देशों के तहत जिले के सभी शहरों, कस्बों और पंचायत क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। ये आदेश 1 जनवरी, 2027 तक प्रभावी रहेंगे। प्रशासन ने अलग-अलग त्योहारों के लिए आतिशबाजी का समय निर्धारित किया है। आदेश के अनुसार, दीपावली के अवसर पर 8 नवंबर को रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

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यानी दिवाली की रात आतिशबाजी के लिए लोगों को केवल दो घंटे का समय मिलेगा। गुरुपर्व पर 24 नवंबर को सुबह 4 से 5 बजे और रात 9 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति रहेगी। वहीं, क्रिसमस के अवसर पर 25 और 26 दिसंबर तथा नववर्ष की पूर्व संध्या और नववर्ष के दौरान 31 दिसंबर और 1 जनवरी को रात 11:55 बजे से अगले दिन रात 12:30 बजे तक आतिशबाजी की जा सकेगी।

दुकान लगाने से पहले लेनी होगी लिखित मंजूरी

जिले में पटाखों की बिक्री करने वाले कारोबारियों को भी प्रशासन के नियमों का पालन करना होगा। पटाखों की थोक और खुदरा बिक्री के लिए संबंधित उपमंडलाधिकारी (नागरिक) यानी एसडीएम से पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना मंजूरी के पटाखे बेचने की अनुमति नहीं होगी।

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प्रशासन ने बिक्री के लिए निर्धारित खुले और सुरक्षित स्थानों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं। दुकानों में आपातकालीन निकास की व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण और रेत से भरी बाल्टियां रखना जरूरी होगा। इसके साथ ही वहां प्रशिक्षित कर्मचारी भी उपलब्ध होने चाहिए, ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाए जा सकें।

पटाखों को उनकी मूल पैकेजिंग में ही रखना होगा। दुकानों के भीतर और आसपास धूमपान, खुली आग जलाने तथा असुरक्षित विद्युत फिटिंग पर रोक रहेगी। आग लगने की आशंका कम करने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी बनाए रखना भी अनिवार्य किया गया है।

इन संस्थानों के आसपास आतिशबाजी पर रोक

प्रशासन ने कुछ संवेदनशील स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है। बाजारों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, शांत क्षेत्रों, धरोहर इमारतों और संरक्षित स्मारकों में तथा इनके आसपास आतिशबाजी नहीं की जा सकेगी। इन निर्देशों का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर दुर्घटनाओं की आशंका कम करना और अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा शांत क्षेत्रों में लोगों को होने वाली परेशानी से बचाना है।

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सभी एसडीएम को पटाखों की दुकानों का निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कारोबारी निर्धारित नियमों के अनुसार ही बिक्री करें। यदि कहीं बिना अनुमति पटाखे बेचे जाते हैं या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पटाखों के कचरे का भी करना होगा उचित निस्तारण

त्योहारों के बाद सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा होने वाले पटाखों के कचरे को लेकर भी प्रशासन ने निर्देश दिए हैं। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को आतिशबाजी से उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना होगा।

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प्रशासन का जोर केवल पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि त्योहारों के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने पर भी है। स्थानीय निकायों को अपने क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने और आतिशबाजी के बाद कचरे का उचित प्रबंधन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

नियम तोड़ने पर होगी कानूनी कार्रवाई

उपायुक्त हेमराज बैरवा ने एसडीएम, डीएसपी, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और पुलिस थाना प्रभारियों को आदेशों का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि तय समय, बिक्री की अनुमति और सुरक्षा मानकों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही यह भी अपील की गई है कि वे त्योहार मनाते समय पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखें। निर्धारित समय के भीतर ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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