शिमला। देवभूमि हिमाचल के शक्तिपीठों में नवरात्रों की धूम मची हुई है। नवरात्रि के नौ दिन माता के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। आज शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी देवी का रूप साधना और तप का प्रतीक है, जो अपने तप और संयम से जीवन में आत्म-संयम और धैर्य को महत्व देती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप-
मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनके एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। वे संयम, साधना और साधुता की देवी हैं। उनके इस रूप से यह संदेश मिलता है कि व्यक्ति को कठिन परिश्रम और तपस्या से अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए। यह भी पढ़ें : हरियाणा में गरजे अनुराग ठाकुर: बोले-जाति धर्म के नाम पर बांट रही कांग्रेसक्या है पूजा की विधि?
स्नान और स्वच्छता- सुबह स्नान करके स्वयं को शुद्ध करें और पूजा स्थल को साफ करें। कलश स्थापन- सबसे पहले पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें, जिसे माँ दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान- मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें और उनके सामने दीपक जलाएं। यह भी पढ़ें : हिमाचल : परिजनों को बेहोश हालत में मिला शख्स, अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम पूजा सामग्री- देवी को पुष्प, अक्षत (चावल), कुमकुम, रोली, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। सफेद फूल विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं। मंत्र उच्चारण- मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का उच्चारण करें, जैसे- "ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः" नैवेद्य और आरती:- देवी को फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें, फिर आरती करें। यह भी पढ़ें : हिमाचल की यामिनी खेलेगी इंटरनेशनल, एथलीट रह चुकी है मांमां ब्रह्मचारिणी के पूजन का महत्व-
- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक के जीवन में आत्म-संयम, तप और संयम का विकास होता है।
- यह दिन विशेष रूप से धैर्य और स्थिरता के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि देवी का यह रूप साधना और ज्ञान का प्रतीक है।
- माना जाता है कि जो भक्त उनकी उपासना करते हैं, वे जीवन की कठिनाइयों का सामना धैर्य और साहस से करने में सक्षम हो जाते हैं।
