शिमला। हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। एक तरफ प्रदेश पर आपदा की मार पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद किए जाने के बाद वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोहरे मोर्चे पर लड़ रहे हिमाचल प्रदेश से जब मोदी सरकार ने मुंह मोड़ लिया, तब प्रदेश की मदद के लिए विश्व बैंक आगे आया है। 

 

विश्व बैंक ने प्रदेश के पुनर्निर्माण और विकास के लिए 24.5 करोड़ डॉलर (करीब 1992 करोड़ रुपये) के ऋण को मंजूरी दी है। यह सहायता उस समय आई है जब दिल्ली के गलियारों से मदद की उम्मीदें धुंधली पड़ चुकी थीं और प्रदेश का खजाना खाली होने की कगार पर खड़ा था। विश्व बैंक की यह मदद राज्य के लिए आर्थिक ऑक्सीजन और आपदा से उबरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्र की बेरुखी और आर्थिक संकट का चक्रव्यूह

हिमाचल प्रदेश वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (राजस्व घाटा अनुदान) बंद किए जाने के बाद प्रदेश के सामने वेतन और विकास कार्यों के लिए बजट जुटाना एक अग्निपरीक्षा बन गया है। ग्रांट बंद होने से हिमाचल गंभीर आर्थिक संकट के दलदल में धंस गया है, जिससे सरकार के लिए रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्च और बुनियादी ढांचे को संभाले रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे नाजुक वक्त में जब केंद्र ने मदद से 'मुंह मोड़ लिया' है, विश्व बैंक का आगे आना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए 'ऑक्सीजन' का काम करेगा।

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तीन वर्षों की तबाही और 17 हजार करोड़ का जख्म

हिमाचल की शांत वादियों पर पिछले तीन वर्षों से मानसून का कहर बनकर टूटा है। आंकड़ों की जुबानी कहें तो वर्ष 2023 और 2025 के बीच प्रदेश को करीब 17 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान हुआ है। सिर्फ 2023 की आपदा ने ही 12 हजार करोड़ के घाव दिए थे, जबकि 2024 में 454 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं और 4800 करोड़ की संपत्ति जमींदोज हो गई। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट तस्दीक करती है कि इस मूसलाधार बारिश ने न केवल घरों और सड़कों को तोड़ा, बल्कि स्कूलों, बाजारों और रोजगार के साधनों को भी ठप कर दिया है।

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'विकास और आपदा पुनरुद्धार परियोजना' से बदलेगी सूरत

विश्व बैंक द्वारा मंजूर किया गया यह कर्ज ‘विकास और आपदा पुनरुद्धार हिमाचल प्रदेश परियोजना’ के तहत खर्च किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाली आपदाओं के खिलाफ प्रदेश को मजबूत बनाना है। इस राशि का उपयोग जल आपूर्ति प्रणालियों को दुरुस्त करने, कृषि और बागवानी क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने और क्षतिग्रस्त सफाई सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए किया जाएगा, ताकि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम किया जा सके।

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किसे मिलेगा इस पैसे का लाभ

इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे सकारात्मक पहलू महिलाओं और स्थानीय कारीगरों का सशक्तिकरण है। विश्व बैंक के इस निवेश से कृषि, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में 10 लाख से अधिक महिलाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सामुदायिक स्वामित्व वाले व्यवसायों में निवेश के जरिए लगभग 12,000 लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। यह योजना न केवल किसानों और उत्पादकों के लिए नए वैश्विक बाजार तैयार करेगी, बल्कि हिमाचल के पारंपरिक कौशल को भी एक नई पहचान दिलाएगी।

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केंद्र से अतिरिक्त मदद की प्रतीक्षा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लगातार केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज और अतिरिक्त सहायता की मांग कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन के तहत कुछ धनराशि जरूर जारी की गई है, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि यह नुकसान की तुलना में बेहद कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1500 करोड़ रुपये की सहायता का ऐलान किया गया था, लेकिन राज्य को अब तक वह राशि प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां लगातार गहराती जा रही हैं।

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