बिलासपुर। वीरभूमि हिमाचल हमेशा से देशभक्ति, त्याग और बलिदान की मिसाल रहा है। इस देवभूमि की मिट्टी में वीरता रची-बसी है, जिसने समय-समय पर देश को ऐसे सपूत दिए हैं जिन्होंने हंसते-हंसते मातृभूमि पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

हिमाचल ने खोया एक और जवान

हर शहादत के साथ हिमाचल की धरती और भी पावन हुई है, लेकिन हर बार किसी मां की गोद सूनी हुई, किसी पिता का सहारा छूटा और किसी परिवार का सपना अधूरा रह गया। इन्हीं अमर बलिदानों की कड़ी में बरठीं क्षेत्र के वीर सपूत नायक अतुल शर्मा का नाम भी अब स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है- जिनकी असमय शहादत ने एक बार फिर पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डुबो दिया है।

 

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सैन्य सम्मान के साथ दी गई विदाई

बरठीं क्षेत्र के लिए गुरुवार का दिन कभी न भूलने वाला बन गया, जब भारतीय सेना के वीर सपूत नायक अतुल शर्मा को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनके निधन की सूचना क्षेत्र में पहुंची, गांव-गांव शोक की लहर दौड़ गई।

 

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तिरंगे में लिपटी देह पहुंची घर

हर आंख नम थी और हर दिल देश के इस होनहार बेटे के असमय चले जाने से भारी हो उठा। जब तिरंगे में लिपटा नायक अतुल शर्मा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया।

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माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मां की चीत्कार, पिता की खामोश आंखें और परिजनों का टूटता हौसला हर किसी को भावुक कर गया। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर कोई अपने इस वीर सपूत को आखिरी बार नमन करना चाहता था।

 

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अतुल शर्मा अमर रहें के नारों की गूंज

अंतिम संस्कार के दौरान भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ नायक अतुल शर्मा को अंतिम सलामी दी। जैसे ही सलामी दी गई, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। “अतुल शर्मा अमर रहें” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। माहौल देशभक्ति और शोक के मिले-जुले भाव से भर गया।

 

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25 साल की उम्र में मिली शहादत

जानकारी के अनुसार, नायक अतुल शर्मा भारतीय सेना की 16 मीडियम आर्टिलरी रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बुधवार शाम उनका निधन हो गया। मात्र 25 वर्ष की उम्र में उनका इस तरह चला जाना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे बरठीं क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

 

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बचपन से ही थी देश सेवा का जुनून

अतुल एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनके सपने और जज्बे असाधारण थे। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा उनके भीतर था और इसी जुनून ने उन्हें भारतीय सेना तक पहुंचाया।

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पूरे गांव में माहौल गमगीन

स्थानीय लोगों का कहना है कि अतुल शर्मा मिलनसार, अनुशासित और मेहनती स्वभाव के थे। गांव में जब भी छुट्टी पर आते, युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देते थे। उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है, लेकिन साथ ही युवाओं के दिलों में देशभक्ति की एक नई चिंगारी भी जगा दी है।

 

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अंतिम विदाई में सैकड़ों लोग हुए शामिल

अंतिम विदाई में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। हर किसी की जुबान पर यही शब्द थे कि नायक अतुल शर्मा ने कम उम्र में देश सेवा का जो उदाहरण पेश किया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

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हमेशा अमर रहेंगे अतुल शर्मा

ग्रामीणों का कहना है कि आज बरठीं क्षेत्र ने अपने एक सपूत को खो दिया है। मगर देश ने एक ऐसे जवान को खोया है जिसने अपनी पूरी जिंदगी मातृभूमि के नाम कर दी। नायक अतुल शर्मा का बलिदान और उनका योगदान हमेशा लोगों के दिलों में अमर रहेगा।

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