नई दिल्ली/शिमला। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। बजट को लेकर हिमाचल प्रदेश की निगाहें दिल्ली पर टिकी हुई थीं। आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्य को केंद्र से बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट पेश होते ही हिमाचल को निराशा हाथ लगी है। 16वें वित्तायोग द्वारा हिमाचल प्रदेश समेत छोटे राज्यों को आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) ग्रांट देने की सिफारिश नहीं किए जाने से राज्य को करीब 40 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

हिमाचल की आर्थिक सेहत पर पड़ेगा असर

आरडीजी ग्रांट बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश समेत सभी छोटे और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों के सामने गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि 15वें वित्तायोग के दौरान हिमाचल प्रदेश को 35 से 40 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली थी, जिससे राज्य के विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सामाजिक योजनाओं को सहारा मिला था। अब इस ग्रांट के समाप्त होने से राज्य की आर्थिक सेहत पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

 

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सुक्खू सरकार की उम्मीदों पर फिरा पानी

केंद्रीय बजट 2026 से हिमाचल को विशेष पैकेज, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त मदद, कर्ज राहत और विकास परियोजनाओं के लिए विशेष सहायता की उम्मीद थी। हालांकि बजट में कुछ राष्ट्रीय योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया, लेकिन हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य के लिए कोई ठोस राहत पैकेज सामने नहीं आया। इससे प्रदेश में बजट को लेकर निराशा और झटका साफ तौर पर देखा जा रहा है।


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इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार और वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल के लिए चार प्रमुख मुद्दे उठाए थे। इनमें

 

  • राजस्व घाटा अनुदान में बढ़ोतरी
    सीएम ने मांग की कि हिमाचल को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये सालाना का राजस्व घाटा अनुदान दिया जाए, ताकि राज्य पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम किया जा सके।
  •  पहाड़ी राज्यों के लिए अलग ग्रीन फंड
    हिमालयी राज्यों की पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को देखते हुए सीएम ने 50,000 करोड़ रुपये सालाना का ग्रीन फंड बनाने की मांग की, जिससे हरित विकास, जंगल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन से जुड़े कार्यों को गति मिल सके।
  • आपदा राहत के लिए विशेष प्रावधान
    हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। सीएम ने बजट में डिजास्टर रिस्क इंडेक्स को अलग से परिभाषित करने और आपदा प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधन देने की मांग रखी।
  • लोन लिमिट में छूट की मांग
    राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अतिरिक्त 2 प्रतिशत तक कर्ज लेने की अनुमति देने का आग्रह किया, ताकि विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के कार्यों को रफ्तार मिल सके।

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हालांकि, बजट 2026 में इन मांगों पर कोई स्पष्ट और ठोस घोषणा नहीं होने से प्रदेश सरकार और आम जनता में मायूसी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरडीजी ग्रांट जैसी सहायता नहीं मिली तो हिमाचल को आने वाले वर्षों में विकास कार्यों में कटौती और वित्तीय प्रबंधन में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 हिमाचल प्रदेश के लिए उम्मीदों से कम और चुनौतियों से भरा साबित हुआ है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और वित्त आयोग के अगले कदमों पर टिकी हैं कि क्या भविष्य में छोटे राज्यों को कोई विशेष राहत दी जाएगी या नहीं।

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