मंडी। हिमाचल प्रदेश में 102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मियों का आंदोलन एक बार फिर सड़क पर है। यह वही कर्मचारी हैं, जो पहले भी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक हड़ताल पर बैठे थे और उस दौरान 17 कर्मियों को कंपनी ने नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब एक बार फिर वही दर्द, वही सवाल और वही अनसुनी मांगें लेकर एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर हैं। इसका असर अब सीधे मरीजों और आम लोगों पर दिखने लगा है।
मंडी में मशाल जुलूस, नम आंखों से बयां किया दर्द
मंडी शहर में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा कर्मियों ने सीटू के बैनर तले विशाल मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस सेरी मंच से लेकर ITI चौक तक निकाला गया। हाथों में मशालें और आंखों में गुस्सा व बेबसी लिए कर्मियों ने सरकार और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : मसाज की आड़ में देह व्यापार- 4 स्पा सेंटरों पर छापेमारी, 17 लड़कियों का रेस्क्यू; कई अरेस्ट
15 साल सेवा, फिर भी 12 हजार वेतन
मीडिया से बातचीत के दौरान एंबुलेंस चालक कमलजीत भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से लगातार दिन-रात 12-12 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ओवरटाइम का एक भी रुपया नहीं दिया जाता।
अब विदेश जाकर ही करूंगा नौकरी
उन्होंने कहा कि उनके भाई विदेशों में लाखों रुपये कमा रहे हैं, जबकि यहां उन्हें महज 12 हजार रुपये का वेतन मिलता है, जिसमें परिवार चलाना असंभव है। मजबूरी में अब वे भी देश छोड़कर बाहर नौकरी करने की सोच रहे हैं। वहीं, इन शब्दों को कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : मजे में लिया पहला डोज- फिर प्राइवेट पार्ट में लेने लगा इंजेक्शन, चिट्टे ने तबाह की एक और जिंदगी
पहले भी उठाई आवाज, तब 17 कर्मी निकाले गए
कर्मियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब वे सड़कों पर उतरे हैं। इससे पहले जब उन्होंने अपने हक की आवाज उठाई थी, तो कंपनी प्रबंधन ने 17 कर्मियों को नौकरी से बाहर कर दिया। इससे बाकी कर्मचारियों में डर का माहौल बनाया गया, लेकिन हालात नहीं सुधरे।
न्यूनतम वेतन और श्रम कानून लागू करने की मांग
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान सुमित कुमार ने बताया कि उनकी मुख्य मांग न्यूनतम वेतन मजदूरी लागू करने की है। इसके साथ श्रम कानूनों और कोर्ट के आदेशों को भी लागू किया जाए। उनका आरोप है कि सरकार और कंपनी प्रबंधन लगातार इन मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: मंदिर गेट पर अचेत पड़ा रहा ट्रक चालक, शराबी समझ किसी ने नहीं की मदद- हुई मौ.त
कंपनी प्रबंधन पर तानाशाही के आरोप
कर्मियों ने आरोप लगाया कि अब कंपनी प्रबंधन तानाशाही रवैया अपना रहा है। जो भी कर्मचारी अपने हक की बात करता है, उसे नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। यूनियन का साफ कहना है कि अब वे यह मनमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पांच दिवसीय हड़ताल, आपात सेवाओं पर असर
गौरतलब है कि एंबुलेंस कर्मी इन दिनों पांच दिवसीय हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर प्रदेश के बड़े अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। कई जगह मरीजों को एंबुलेंस न मिलने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें : HRTC बस में पहली बार महिला ड्राइवर- कंडक्टर की जोड़ी: सीमा और मीनू ने जीता सवारियों का दिल
मरीज और परिजन सबसे ज्यादा परेशान
इस हड़ताल के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों और मरीजों को हो रही है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है।
यह भी पढ़ें : मंडी शिवरात्रि : बाबा भूतनाथ के दर्शन के लिए खुले कपाट, इतिहास में पहली बार होगा कुछ ऐसा- जानें
आगे और उग्र होगा आंदोलन
एंबुलेंस कर्मियों का कहना है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। सवाल यह है कि जीवन रक्षक सेवा से जुड़े कर्मियों की यह लड़ाई कब खत्म होगी और आम लोगों को राहत कब मिलेगी।
