मनाली/शिमला: हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल मनाली से एक ऐसे मामले में गिरफ्तारी की है, जिसकी जांच करोड़ों रुपये की नकली भारतीय करेंसी की बरामदगी से जुड़ी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मनाली से हरीश रौंटा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, उसका नाम पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट से बरामद 17 करोड़ 29 लाख रुपये के कथित नकली नोटों के मामले में सामने आया है।
इस मामले ने इसलिए गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि जांच के केंद्र में बैंक की करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील व्यवस्था है। इतनी बड़ी मात्रा में कथित जाली नोटों का वहां तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए अहम सवाल बना हुआ है। मनाली से हुई गिरफ्तारी के बाद इस बड़े मामले में हिमाचल प्रदेश का कनेक्शन भी चर्चा में आ गया है।
मनाली पहुंची NIA, हरीश रौंटा गिरफ्तार
जानकारी के मुताबिक, NIA ने 22 अक्तूबर को मनाली से हरीश रौंटा को गिरफ्तार किया। इससे पहले एजेंसी ने 16 अक्तूबर को अंबाला से अजय कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने दोनों को इस मामले की कथित साजिश में अहम भूमिका निभाने वाले आरोपियों के रूप में देखा है। मामले में उनकी वास्तविक भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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मनाली से हुई गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गया है। एजेंसी कथित नकली करेंसी के नेटवर्क, उसकी सप्लाई और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
सात लाख रुपये के नकली नोट से शुरू हुई जांच
इस मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से नकली नोट मिलने की सूचना के बाद हुई थी। शुरुआती स्तर पर करीब सात लाख रुपये के नकली नोट मिलने की बात सामने आई थी। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ मामला कहीं अधिक बड़ा होता चला गया। जांच में कथित नकली करेंसी की कुल राशि 17 करोड़ 29 लाख रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई। इस बड़े आंकड़े ने पूरे मामले की गंभीरता बढ़ा दी और जांच एजेंसियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित हुआ कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।
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बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे करोड़ों के जाली नोट?
जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैंक की सुरक्षित व्यवस्था में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पहुंचे कैसे। करेंसी चेस्ट वह स्थान होता है, जहां बैंकों के लिए बड़ी मात्रा में नकदी रखी जाती है और जरूरत के अनुसार विभिन्न बैंक शाखाओं तथा एटीएम तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में करेंसी चेस्ट से कथित नकली नोटों की इतनी बड़ी बरामदगी केवल नकली मुद्रा के स्रोत का पता लगाने तक सीमित नहीं है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण है कि नोट किस माध्यम से वहां पहुंचे, नकदी की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में क्या हुआ तथा इस पूरे घटनाक्रम में किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल इन सवालों के अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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हिमाचल सहित कई राज्यों तक फैली जांच
इस मामले में अब तक सात गिरफ्तारियां होने की बात सामने आई है। जांच की कड़ियां उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आगे बढ़ते हुए हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक पहुंची हैं। अंबाला से अजय कुमार की गिरफ्तारी और उसके बाद मनाली से हरीश रौंटा को पकड़े जाने के बाद एजेंसी कथित नेटवर्क के विभिन्न संपर्कों की पड़ताल कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित नकली नोटों की छपाई, उनके परिवहन और वितरण में कौन-कौन शामिल था। हालांकि, इस नेटवर्क की पूरी संरचना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
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111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप भी जांच के दायरे में
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू करीब 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, सहारनपुर की इसी करेंसी चेस्ट से यह खेप भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जयपुर कार्यालय भेजी गई थी। अब इस खेप को लेकर भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि इस करेंसी खेप में शामिल नोटों की स्थिति क्या थी और इसका 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों की बरामदगी वाले मामले से क्या संबंध है। 111 करोड़ रुपये की पूरी खेप को नकली करार देना फिलहाल सही नहीं होगा, क्योंकि इस संबंध में जांच के निष्कर्षों की पुष्टि होना जरूरी है।
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हिमाचल बना जांच का केंद्र, कई और बड़े खुलासों की उम्मीद
मनाली से हुई इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने पूरे हिमाचल प्रदेश को इस अंतर्राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय फर्जी नोट नेटवर्क के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। अब एनआईए हरीश रौंटा से दिल्ली में पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और आखिर बैंक के भीतर किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत से इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव हो सका।
नकली करेंसी के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही एजेंसी
NIA की जांच का दायरा कथित नकली नोटों की बरामदगी से आगे बढ़कर उनके स्रोत, परिवहन और बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंचने की परिस्थितियों की पड़ताल तक फैला हुआ है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी राशि के जाली नोट किन रास्तों से गुजरे और इस प्रक्रिया में किस स्तर पर किसकी भूमिका रही। सहारनपुर की करेंसी चेस्ट से सामने आए मामले में मनाली से हुई गिरफ्तारी ने जांच को हिमाचल के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
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अब निगाहें जांच के अगले चरण पर हैं, जिसमें आरोपियों के बीच संबंध, कथित करेंसी नेटवर्क और 111 करोड़ रुपये की खेप से जुड़े सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। फिलहाल, 17 करोड़ 29 लाख रुपये के कथित नकली नोटों की बरामदगी और मनाली से हुई गिरफ्तारी इस मामले के प्रमुख पहलू हैं। जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
