#अव्यवस्था
October 23, 2026
हिमाचल में पढ़ाई के नाम पर मजाक! सरकारी स्कूल की खुली पोल, कहीं एक तो कहीं दो ही कमरे
यू-डाइस रिपोर्ट में सामने आई हिमाचल के सरकारी स्कूलों की तस्वीर
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा के दावों के बीच स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने रख दी है। प्रदेश में 470 स्कूल ऐसे हैं- जहां पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा है। जबकि 2,122 स्कूल दो कमरों के सहारे चल रहे हैं।
यू-डाइस के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल में 470 स्कूलों में सिर्फ एक-एक कमरा है, जबकि 2,122 स्कूलों में सिर्फ दो-दो कमरे ही उपलब्ध हैं। इनमें प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक के स्कूल शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित जगह में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई किस तरह संचालित की जाती होगी।
एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को बैठाना, अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करवाना और सभी विद्यार्थियों पर पर्याप्त ध्यान देना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। वहीं, विद्यार्थियों को भी अपनी कक्षा के अनुरूप शांत वातावरण और पढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलना जरूरी है। स्कूलों में कमरों की उपलब्धता का मुद्दा ऐसे समय में अहम हो जाता है- जब शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 9,720 प्राथमिक और 1,735 मिडिल स्कूल हैं। इन दोनों श्रेणियों में कुल 2,585 स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास केवल एक या दो कमरे हैं। प्राथमिक स्तर पर पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। यदि स्कूल में जगह सीमित हो, तो अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है।
ऐसी स्थिति में एक कक्षा को पढ़ाते समय दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से काम देना, शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल करना और सभी बच्चों की सीखने की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होता। मिडिल स्कूलों में छठी से आठवीं तक अलग-अलग विषयों की पढ़ाई होती है। यहां भी पर्याप्त कमरे नहीं होने पर शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में परेशानी आ सकती है।
प्रदेश के 9,720 प्राथमिक स्कूलों में कमरों की उपलब्धता एक समान नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 1,913 स्कूलों में दो कमरे हैं। वहीं, 3,733 स्कूलों में तीन कमरे और 3,523 स्कूलों में चार से छह कमरे उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, 251 प्राथमिक स्कूलों में सात से दस कमरे हैं, जबकि 11 से 15 कमरों वाले स्कूलों की संख्या केवल 18 है। उपलब्ध आंकड़ों में 15 से अधिक कमरों वाला कोई प्राथमिक स्कूल दर्ज नहीं है। वहीं, 282 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक कमरा उपलब्ध है।
प्रदेश के 1,735 मिडिल स्कूलों में 181 स्कूलों के पास एक कमरा और 209 स्कूलों के पास दो कमरे हैं। सबसे अधिक 1,014 स्कूलों में तीन कमरे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, 307 स्कूलों में चार से छह कमरे और 23 स्कूलों में सात से दस कमरे उपलब्ध हैं। केवल एक मिडिल स्कूल में 11 से 15 कमरे दर्ज हैं।
मिडिल स्तर पर विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करनी होती है। ऐसे में केवल कमरों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या और उपलब्ध शिक्षकों के अनुसार व्यवस्था होना भी जरूरी है।
आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 967 हाई स्कूलों में से पांच के पास केवल एक कमरा है, जबकि 27 स्कूल दो कमरों में संचालित हो रहे हैं। 138 स्कूलों में तीन कमरे और 714 स्कूलों में चार से छह कमरे दर्ज हैं। सात से दस कमरों वाले हाई स्कूलों की संख्या 68 है। वहीं, 13 स्कूलों में 11 से 15 कमरे और दो स्कूलों में 15 से अधिक कमरे उपलब्ध हैं।
वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर प्रदेश में कुल 1,975 स्कूल हैं। इनमें दो स्कूलों के पास एक कमरा और तीन के पास दो कमरे हैं। 20 स्कूलों में तीन कमरे उपलब्ध हैं। दूसरी ओर, 224 स्कूलों में चार से छह कमरे, 1,034 में सात से दस कमरे, 464 में 11 से 15 कमरे और 228 स्कूलों में 15 से अधिक कमरे दर्ज किए गए हैं।
स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को लेकर स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी बहुत कम है और ऐसे स्कूलों की समीक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि स्कूलों में सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए कॉम्प्लेक्स सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके तहत आसपास स्थित स्कूलों के भवनों का भी जरूरत के अनुसार उपयोग किया जा रहा है। निदेशक के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।