धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की बेटियां यह साबित कर रही हैं कि विपरीत परिस्थितियां उनके हौसलों को कमजोर नहीं] बल्कि और मजबूत बनाती हैं। संघर्ष] जिम्मेदारियों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बीच भी वे अपने सपनों की राह नहीं छोड़तीं। कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां क्षेत्र की बेटी गोल्डी कौंडल इसकी ताज़ा और सशक्त मिसाल बनकर सामने आई हैं] जिन्होंने पहले ही प्रयास में कृषि विकास अधिकारी (ADO) परीक्षा उत्तीर्ण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

तीन साल पहले खो दी थी मां की ममता

एक अनुशासित सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली गोल्डी कौंडल के जीवन में परिस्थितियां कभी आसान नहीं रहीं। उनके पिता संजीवन कुमार भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। करीब तीन वर्ष पहले उनकी माता स्वर्गीय सुमन के असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। कम उम्र में ही पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ] मानसिक आघात और भविष्य की चुनौतियां उनके सामने खड़ी थीं] लेकिन गोल्डी ने हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।

 

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गोल्डी शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य के प्रति बेहद सजग रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गैलेक्सी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल नगरोटा सूरियां से पूरी की। इसके बाद उन्होंने एटरनल यूनिवर्सिटी बड़ू साहिब से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें यहीं नहीं रोका और उन्होंने सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से एमएससी एग्रीकल्चर (बायोटेक्नोलॉजी) की उच्च डिग्री प्राप्त की।

पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

पहले ही प्रयास में ADO परीक्षा में सफलता प्राप्त करना उनकी निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और अनुशासन का स्पष्ट प्रमाण है। इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरे नगरोटा सूरियां क्षेत्र में गर्व और उत्साह की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने गोल्डी को बधाइयां देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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अपनी सफलता को लेकर गोल्डी कौंडल बेहद विनम्र हैं। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता के मार्गदर्शन, अपनी माता के संस्कारों और स्वयं के अथक परिश्रम को दिया है। उनका कहना है कि कठिन समय ने उन्हें टूटना नहीं, बल्कि मजबूत होना सिखाया।

अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बनी गोल्डी कौंडल

गोल्डी कौंडल की यह सफलता प्रदेश की उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। हिमाचल की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और गोल्डी कौंडल का नाम इस प्रेरक सूची में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है।

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