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December 31, 2025

हिमाचल : गरीबी ने मुश्किल की राहें- किताबें बनीं सहारा, अब तहसीलदार बना लोकेंद्र

कई युवा परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं, वहीं लोकेंद्र ने हालातों से लड़ना चुना

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HAS Result 2025 Lokendra Paul

मंडी। टूटे हालात, खाली जेब और आंखों में सपने हजार- जो हार न माने जिंदगी से, वही लिखता है जीत की कहानी। संघर्ष, अभाव और जिम्मेदारियों के बीच पला-बढ़ा एक साधारण सा बेटा जब तहसीलदार बनता है, तो उसकी सफलता सिर्फ एक नियुक्ति नहीं होती, बल्कि हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की रोशनी बन जाती है।

गरीब परिवार का बेटा बना तहसीलदार

मंडी जिले के शाला गांव निवासी लोकेंद्र पाल ने यही कर दिखाया है। गरीबी, सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर तहसीलदार का पद हासिल किया है। उनकी यह कामयाबी आज पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।

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बचपन से ही संघर्षों से रहा सामना

लोकेंद्र पाल का बचपन संघर्षों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन सपनों की उड़ान कभी कमजोर नहीं पड़ी। सीमित साधनों के बीच उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया। किताबें ही उनके लिए रास्ता बनीं और मेहनत ही उनका हथियार। जहां कई युवा परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं, वहीं लोकेंद्र ने हालातों से लड़ना चुना।

पहली सफलता, लेकिन मंजिल अभी दूर थी

पढ़ाई के बाद लोकेंद्र पाल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। कठिन मेहनत के बाद उनका चयन लोक निर्माण विभाग (PWD) में JE के पद पर हुआ। यह उनके जीवन की पहली बड़ी सफलता थी। हालांकि, यह उपलब्धि किसी सपने के पूरे होने जैसी थी, लेकिन लोकेंद्र का लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर आम लोगों की समस्याओं को नजदीक से समझना और उनका समाधान करना चाहते थे।

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नौकरी के साथ संघर्ष जारी

वर्तमान समय में लोकेंद्र पाल श्रम मंत्रालय (लेबर मिनिस्ट्री) में एनफोर्समेंट ऑफिसर (EO) के पद पर कार्यरत हैं। जिम्मेदारियों से भरी नौकरी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा।

HAS Lokendra Paul

दिन का हर पल था कीमती

दिन का हर पल कीमती था-ड्यूटी, परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन लोकेंद्र ने समय प्रबंधन और अनुशासन को अपनी ताकत बनाया। कई बार परीक्षा में सफलता हाथ से फिसली, निराशा भी आई, लेकिन हौसला कभी नहीं टूटा।

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सपना बना हकीकत, बने तहसीलदार

कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने के बाद भी लोकेंद्र पाल का सपना स्पष्ट था-प्रशासनिक अधिकारी बनना। उसी लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखे और आखिरकार हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर तहसीलदार बने।

युवाओं के लिए मजबूत संदेश

अपनी सफलता पर लोकेंद्र पाल कहते हैं कि गरीबी कभी भी सपनों की सबसे बड़ी दुश्मन नहीं होती, बल्कि हार मान लेना सबसे बड़ी कमजोरी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि असफलताओं से घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें सीख में बदलें। लगातार प्रयास, सही दिशा और आत्मविश्वास के साथ किया गया संघर्ष एक दिन जरूर रंग लाता है।

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