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August 5, 2025

हिमाचल रचने जा रहा इतिहास: पहली बार इस दिन सरकारी अस्पताल में होगी रोबोटिक सर्जरी

हिमाचल चिकित्सा क्षेत्र में नई क्रांति की देगा दस्तक

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Himachal  Robotic Surgery

शिमला। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। राजधानी शिमला के समीप चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान अब प्रदेश की पहली रोबोटिक सर्जरी का गवाह बनने जा रहा है। अत्याधुनिक "द विंची रोबोटिक सर्जरी सिस्टम" की मदद से यूरोलॉजी विभाग द्वारा यह सर्जरी 7 अगस्त को की जाएगी, जो न केवल हिमाचल बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी।

पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में रोबोट करेगा ऑपरेशन

यह पहली बार होगा जब प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में पूरी तरह ऑटोमेटेड और डॉक्टर-नियंत्रित रोबोटिक सिस्टम से ऑपरेशन किया जाएगा। यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंपोष रैना और वरिष्ठ सर्जन डॉ. अनंत कुमार इस ऐतिहासिक सर्जरी का नेतृत्व करेंगे। पहली सर्जरी प्रोस्टेट स्टोन (पेशाब की थैली की पथरी) से पीड़ित मरीज पर की जाएगी, जिसे सोमवार शाम को अस्पताल में भर्ती किया गया है।

 

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डॉ रैना ने बताया, “यह सिर्फ एक तकनीकी उन्नति नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति है। हम डॉक्टर अब मशीन की मदद से चार हाथों से सर्जरी कर सकते हैं, जो पहले सिर्फ एक सपने जैसा लगता था।”

क्या है 'द विंची रोबोटिक सर्जरी सिस्टम'?

यह तकनीक मेडिकल साइंस की सबसे अत्याधुनिक, जटिल और सटीक सर्जिकल प्रणाली मानी जाती है। सिस्टम तीन प्रमुख हिस्सों में बंटा होता है:

  • पेशेंट कार्ट – इसमें चार रोबोटिक बाजू होते हैं, जिनमें तीन सर्जिकल उपकरण और एक एंडोस्कोपिक कैमरा लगाया जाता है।
  • विजन कार्ट – यह डॉक्टर को ऑपरेशन क्षेत्र का थ्री-डी, हाई-रेजोल्यूशन और 10 गुना ज़ूम किया हुआ दृश्य दिखाता है।
  • सर्जिकल कंसोल – डॉक्टर इसी कंसोल पर बैठकर हाथ और पैरों से रोबोट को नियंत्रित करते हैं, जिससे ऑपरेशन अद्वितीय सटीकता से पूरा होता है।

सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सहायक डॉक्टर की आवश्यकता नहीं होती — सर्जन अकेले ही सभी रोबोटिक इंस्ट्रूमेंट्स और कैमरे का संचालन करता है।

 

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क्यों खास है यह तकनीक?

  • कम समय में ऑपरेशन: जो सर्जरी पहले 8 घंटे लेती थी, वह अब 3 घंटे में हो सकेगी।
  • कम रक्तस्राव: पारंपरिक प्रोस्टेट सर्जरी में जहां लगभग 1 लीटर तक खून बहता था, वहीं रोबोटिक सर्जरी में यह मात्र 50 मि.ली. तक सीमित रहता है।
  • तेज़ रिकवरी: मरीज को कम दर्द, कम संक्रमण और जल्दी स्वस्थ होने का लाभ मिलेगा।
  • न्यूनतम घाव: अत्यंत सूक्ष्म चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज की अस्पताल में रुकने की अवधि भी घट जाती है।

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चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर

इस पहल को स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल और तकनीकी विकास की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। भविष्य में यह तकनीक केवल यूरोलॉजी ही नहीं, बल्कि गाइनोकोलॉजी, ट्यूमर सर्जरी और अन्य जटिल मामलों में भी इस्तेमाल की जाएगी।

हिमाचल के नाम एक और उपलब्धि

यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के नक्शे पर एक नई पहचान देगी। राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में यह पहला मजबूत कदम है। इसके साथ ही प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां सरकारी संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

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