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January 5, 2026

हिमाचल : सेना में लेफ्टिनेंट बना गांव का बेटा, देशभर में किया टॉप- परिवार ने नाटी डालकर किया स्वागत

पहले ही प्रयास में पास की थी रजत ने कठिन परीक्षा

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Rajat Verma Indian Army Lieutenant

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जुन्गा क्षेत्र से सटे पीरन गांव के लिए यह दिन इतिहास बन गया, जब गांव का बेटा रजत वर्मा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पहली बार अपने घर लौटा।

लेफ्टिनेंट बन गांव लौटा रजत

राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रविवार को रजत के गांव पहुंचते ही उत्सव जैसा माहौल बन गया। फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच ग्रामीणों ने अपने लाल का भव्य स्वागत किया। परिजनों व ग्रामीणों ने नाटी डालकर रजता का स्वागत किया

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गांव में उमड़ा गर्व,भावनाओं का सैलाब

जैसे ही रजत वर्मा गांव की सरहद पर पहुंचे, पूरा पीरन गांव मानो एक परिवार में बदल गया। हर चेहरे पर खुशी और हर आंख में गर्व साफ झलक रहा था। लोगों ने रजत को फूलों की मालाएं पहनाईं और भारत माता की जय के नारों से वातावरण गूंज उठा।

भावुक हुए माता-पिता

इस भावुक क्षण के सबसे साक्षी बने रजत के माता-पिता। बेटे की उपलब्धि पर पिता खजान सिंह वर्मा और माता शकुंतला वर्मा खुद को रोक नहीं पाए। स्वागत के दौरान उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। गांव वालों के लिए यह केवल एक युवक की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का सम्मान था।

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पहले ही प्रयास में बिना कोचिंग पाई सफलता

रजत वर्मा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पहले ही प्रयास में, बिना किसी कोचिंग के CDS जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की। कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और अनुशासन के दम पर रजत ने ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल की और इस क्षेत्र से पहले सेना अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया।

माता-पिता का सपना हुआ साकार

रजत के पिता खजान सिंह वर्मा शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं, जबकि माता शकुंतला वर्मा गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने रजत को पढ़ाई और संस्कारों में कभी पीछे नहीं रहने दिया। माता-पिता बताते हैं कि रजत बचपन से ही अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा है।

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शैक्षणिक सफर भी रहा शानदार

रजत वर्मा ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज सोलन से बीए (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने स्वयं अध्ययन कर सीडीएस परीक्षा की तैयारी की और अपने सपने को हकीकत में बदला।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रजत

गांव के युवाओं का कहना है कि रजत की सफलता ने उन्हें भी बड़े सपने देखने और देश सेवा की राह चुनने की प्रेरणा दी है। रजत ने अपने स्वागत के दौरान कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों और गांव के हर व्यक्ति की दुआओं का परिणाम है।

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वर्दी में ढला गांव का सपना

रजत वर्मा अब भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट अपनी सेवाएं देंगे। उनका यह सफर साबित करता है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। लोगों का कहना है कि रजत ने ये साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ों से निकलकर भी देश की शान बना जा सकता है।

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