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February 7, 2026

हिमाचल की ज्योति बनी फ्लाइंग ऑफिसर, कड़ी मेहनत से पूरा किया आसमान छूने का सपना

ज्योति ने रोशन किया माता-पिता का नाम

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में बेटों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रही हैं। कहते हैं ख्वाब जब हौसलों से जुड़ जाते हैं, तो गांव की गलियां भी आसमान तक पहुंच जाती हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की बेटी ने ये साबित कर दिखाया है।

फ्लाइंग ऑफिसर बनी ज्योति

निरमंड तहसील के नावा गांव की बेटी ज्योति, जिन्हें जागृति के नाम से भी जाना जाता है भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बन गई हैं। फ्लाइंग ऑफिसर बनकर ज्योति ने ना सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

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बधाई देने वालों का लगा तांता

जैसे ही यह खबर गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने जागृति और उनके परिवार को बधाइयां दीं। नावा गांव में इसे बेटियों की उड़ान और सपनों की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

 

Flying Officer Jyoti

पिता के नक्शे कदम पर चली ज्योति

(ज्योति) जागृति को देशसेवा का जज्बा विरासत में मिला है। उनके पिता तेजा देव वर्तमान में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ITBP में असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। तेजा देव उत्तर-पूर्वी सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात हैं।

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बड़े मिशन में पिता की भागीदारी

वह वर्ष 2010-11 में संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीका शांति मिशन के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ज्योति की माता अरुणा देवी एक गृहिणी हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

माता-पिता ने बढ़ाया हौसला

उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में अपनी बेटियों का हौसला बढ़ाया और उनके सपनों को पंख देने के लिए निरंतर संघर्ष किया। जागृति की छोटी बहन कृतिका भी मेधावी छात्रा हैं और वर्तमान में सेंट बीड्स कॉलेज, शिमला से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं।

 

Flying Officer Jyoti

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सात वर्षों की मेहनत ने दिलाई उड़ान

भारतीय वायु सेना तक पहुंचने का सफर जागृति के लिए आसान नहीं था। यह सफलता सात वर्षों के निरंतर अभ्यास, अनुशासन और घर से दूर रहकर की गई कड़ी तपस्या का परिणाम है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर और अंबिका पब्लिक स्कूल, निरमंड से प्राप्त की।

NCC एयर विंग से जुड़ीं

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह चंडीगढ़ गईं, जहां उन्होंने DAV कॉलेज, चंडीगढ़ से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान जागृति NCC एयर विंग से जुड़ीं। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर A-ग्रेड के साथ सC-सर्टिफिकेट हासिल किया। NCC प्रशिक्षण के दौरान ही उनमें उड़ान के प्रति गहरी रुचि विकसित हुई, जिसने उन्हें वायु सेना की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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माइक्रो प्लेन में भरी उड़ान

जागृति की उड़ान कौशल का प्रमाण उस समय मिला, जब उन्होंने माइक्रो प्लेन में को-पायलट के मार्गदर्शन में 40-40 मिनट की दो सफल उड़ानें भरीं। इस दौरान उन्होंने आसमान में ओवरटेकिंग, संतुलन बनाए रखना और सुरक्षित लैंडिंग जैसे जटिल अभ्यासों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इन उड़ानों ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया और वायु सेना में चयन की दिशा को स्पष्ट किया।

 

क्या बोले ज्योति के माता-पिता?

जागृति के माता-पिता ने बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय ईष्ट देवताओं की कृपा, रिश्तेदारों के सहयोग और शिक्षण संस्थानों के मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से राजमाता शांति देवी स्कूल पोखधार, DAV कॉलेज, पंजाब यूनिवर्सिटी और NCC एयर विंग के शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया, जिनके मार्गदर्शन से जागृति को सही दिशा मिली।

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प्रदेश की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा

ज्योति उर्फ जागृति की यह उपलब्धि आज हिमाचल प्रदेश की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं। पहाड़ी क्षेत्र की सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों, तो कोई भी ऊंचाई दूर नहीं होती।

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