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January 11, 2026

हिमाचल के दो वीरों को मिला सेना मेडल : एक ने 3 आतं.की किए ढेर, दूसरे ने अपनी टीम को बचाया

17 हजार फुट की ऊंचाई पर साहस की मिसाल

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सिरमौर। वीरभूमि हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि यह केवल पहाड़ों की धरती नहीं, बल्कि वीरता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की मजबूत पहचान है। सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के दो वीरों को भारतीय सेना द्वारा सम्मानित किया गया है।

दो वीरों को मिला सेना मेडल

गिरिपार के छोटे से गांव चियाड़ो के सूबेदार बाबू राम शर्मा और नौहराधार के थनगा गांव के जवान अनिल कुमार को भारतीय सेना द्वारा सेना मेडल से सम्मानित किया जाना पूरे जिले के लिए गौरव का विषय बन गया है। दोनों वीर जवानों ने अलग-अलग परिस्थितियों और मोर्चों पर अपने अदम्य साहस से यह दिखा दिया कि जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो सिरमौर के बेटे पीछे नहीं हटते।

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17 हजार फुट की ऊंचाई पर साहस की मिसाल

गत्ताघार क्षेत्र के चियाड़ो गांव निवासी सूबेदार बाबू राम शर्मा 26 नवंबर 2023 को 18वीं डोगरा बटालियन के साथ अत्यंत संवेदनशील इलाके में तैनात थे। 17,000 फुट की ऊंचाई, चारों ओर बर्फ, तेज हवाएं और बेहद सीमित दृश्यता- ऐसे हालात में वे निगरानी गश्त का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान उनकी टीम अनजाने में बारूदी सुरंग क्षेत्र में फंस गई। एक छोटी-सी चूक पूरे दस्ते के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।

 

SUBEDAR BABU RAM SHARMA

पूरी टीम को बचाया

खराब मौसम और लगातार बढ़ते खतरे के बावजूद सूबेदार बाबू राम शर्मा ने असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़ते हुए करीब पांच घंटे तक कठिन मशक्कत की और इन्फेंट्री सेफ लेन तैयार की। उनके साहसिक निर्णय और नेतृत्व क्षमता के कारण पूरी टीम सुरक्षित बाहर निकल सकी। इसी अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया।

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संघर्षों से बनी सफलता की कहानी

सूबेदार बाबू राम शर्मा की कहानी केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। वर्ष 1998 में बेहद साधनहीन परिस्थितियों में सेना में भर्ती हुए बाबू राम शर्मा अपने गांव से सेना में जाने वाले पहले व्यक्ति हैं। गांव में न तो पक्की सड़क थी और न ही अभ्यास के लिए मैदान। इसके बावजूद उन्होंने पथरीले पहाड़ी रास्तों पर दौड़ लगाकर अपनी तैयारी की।

 

Army Medal to Sirmaur 2 soldiers

 

पिता देवी राम और माता चंदो देवी के त्याग, अनुशासन और परिवार के सहयोग से उन्होंने करीब 28 वर्षों की सैन्य सेवा पूरी की। आज उनका नाम केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गिरिपार क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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कश्मीर में गूंजा सिरमौर का पराक्रम

दूसरी ओर, नौहराधार के थनगा गांव निवासी जवान अनिल कुमार ने जम्मू-कश्मीर के डोडा क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन लागौर के दौरान अद्वितीय साहस का परिचय दिया। 26 जून 2024 को राष्ट्रीय राइफल के जवान के रूप में तैनात अनिल कुमार ने शार्प शूटर की भूमिका निभाते हुए मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को सटीक निशाने से ढेर कर दिया।

 

उनकी इस निर्णायक कार्रवाई से आतंकियों की भागने की कोशिश नाकाम हुई और ऑपरेशन को सफलता मिली। दुश्मन के खिलाफ उनकी निर्भीकता और पेशेवर दक्षता ने साथी जवानों की जान भी सुरक्षित रखी।

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जयपुर में सम्मान, गांव में उत्सव

अनिल कुमार की बहादुरी को सम्मान देते हुए भारतीय सेना की साउथ-वेस्टर्न कमांड ने 9 जनवरी को जयपुर में आयोजित समारोह में उन्हें सेना मेडल से अलंकृत किया। वर्ष 2008 में 72 आर्म्ड रेजिमेंट में भर्ती हुए अनिल कुमार आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।

 

NATIONAL RIFLE SOLDIER ANIL KUMAR

हालांकि उनके पिता इस गौरवपूर्ण क्षण को देखने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन गांव थनगा में मां और बहनों की आंखों में गर्व के आंसू साफ झलक रहे हैं। पूरे इलाके में मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने इस उपलब्धि को अपना सम्मान माना।

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वीरों की धरती सिरमौर

गौरतलब है कि सिरमौर जिला अब तक 43 वीर सपूतों को देश के लिए समर्पित कर चुका है। यहां की हर घाटी, हर गांव देशभक्ति और बलिदान की कहानियों से भरा हुआ है। सूबेदार बाबू राम शर्मा और जवान अनिल कुमार की शौर्य गाथाएं इस परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।

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