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February 11, 2026

हिमाचल का सितारा दुबई में चमका, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीता मेडल; देश का बढ़ाया मान

कद कम होने पर भी नहीं टूटा भरोसा 

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Inspirational Story

ऊना। अक्सर लोग अपनी कमजोरी या हालात को ही अपनी मंजिल की रुकावट मान लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन्हीं मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेते हैं और अपने हौसले से कमाल कर दिखाते हैं।

पूरे परिवार सहित देश का किया नाम रोशन 

ऐसा ही कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के रहने वाले सुनील कुमार ने। उन्होंने दुबई में आयोजित फाजा वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश और देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। सुनील की यह उपलब्धि इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी कमजोरी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।

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कद कम होने पर भी नहीं टूटा भरोसा 

ऊना जिले के अंब उपमंडल के छोटे से गांव लंडेर लंढ़ियां के रहने वाले सुनील कुमार  जिनका कद महज 3 फीट 4  इंच अपनी शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में 32.47 मीटर दूर भाला फेंककर रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया।

सुनील की जीत से गांव में खुशी की लहर

सुनील की यह प्रतियोगिता बीते कल मंगलवार करीब शाम 7 बजकर 44 मिनट पर हुई। जैसे ही गांव में उनके मेडल जीतने की खबर पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव के लोग एक-दूसरे को बधाइयां देने लगे और परिवार के घर पर जश्न जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि सुनील ने साबित कर दिया कि मेहनत और हौसले के दम पर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।    

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सुनील कुमार ने तिरंगे के लिए मेडल जीता 

सुनील कुमार ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनका सपना हमेशा तिरंगे के लिए मेडल जीतना था। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके लगातार अभ्यास, कड़ी मेहनत और माता-पिता के आशीर्वाद का नतीजा है। भावुक होते हुए सुनील बोले, “बाधाएं केवल मन में होती हैं।

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अगर इंसान ठान ले तो दुनिया का कोई भी मंच छोटा नहीं पड़ता। उनकी बातों में आत्मविश्वास साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों ने उनके कद को देखकर शक किया, लेकिन उन्होंने कभी खुद पर शक नहीं किया। यही भरोसा उन्हें यहां तक लेकर आया।

स्कूल में करते हैं नौकरी

सुनील कुमार फिलहाल जुबेहड़ स्थित एक स्कूल में मल्टी टास्क वर्कर के रूप में कार्यरत हैं। नौकरी के साथ-साथ वे अपने खेल की तैयारी भी करते रहे। सुबह-शाम अभ्यास, सीमित संसाधन और कड़ी दिनचर्या, इन सबके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

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इन लोगों को दिया सफलता का श्रेय 

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता सुमन बाला, पिता राम पाल और अपने कोच ललित ठाकुर को दिया। सुनील ने कहा कि अगर परिवार और कोच का साथ न होता तो यह सफर इतना आसान नहीं होता।

विधायक ने दी बधाई

सुनील की इस उपलब्धि पर चिंतपूर्णी के विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने भी सोशल मीडिया के जरिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि सुनील जैसे खिलाड़ी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।

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अभी बाकी है एक और मुकाबला

खास बात यह है कि सुनील के पास अभी एक और मेडल जीतने का मौका है। आज शाम 4 बजे वे शॉटपुट स्पर्धा में हिस्सा लेने जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि वे वहां भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं और स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतकर देश का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।

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