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December 18, 2025

हिमाचल : दो सगी बहनों का एक साथ हुआ सेना में चयन, BSF की वर्दी में बॉर्डर पर देंगी पहरा

खेल के मैदान से सीमा की सुरक्षा तक का सफ़र

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Bilaspur Handball Players

बिलासपुर। किसी ने क्या खूब लिखा है कि, मेहनत वो चाबी है जिससे सपनों के ताले खुल जाया करते हैं… हौसले वो पर हैं, जो मंज़िल तक उड़ान भर देते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बिलासपुर जिले की दो सगी बहनों ने। जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि अगर मन में लक्ष्य हो और विश्वास अटूट हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

BSF की वर्दी में आएंगी नजर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले की दो सगी बहनों आरुषि चौहान और संजना चौहान ने एक साथ सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ में चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है। दरअसल, खेल कोटे से चयनित अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी दोनों बहनें अब बीएसएफ की वर्दी में देश की सीमाओं की रक्षा करेंगी।

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घुमारवीं उपमंडल के बछड़ी मोरसिंघी गांव की इन दो सगी बहनों ने अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर एक नई पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं आरुषि चौहान और संजना चौहान का चयन खेल कोटे के तहत हुआ है।

कड़ी मेहनत कर पाया मुकाम

आरुषि और संजना चौहान ने बेहद सीमित संसाधनों के बीच खेल अभ्यास की शुरुआत की थी, लेकिन लगन, अनुशासन और निरंतर मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

 

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विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर दोनों बहनों ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसका नतीजा अब देश के प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल में चयन के रूप में सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बहनों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे गांवों से निकलकर भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।

युवाओं को खेल में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा

मोरसिंघी हैंडबॉल नर्सरी की कोच स्नेहलता और प्रशिक्षक सचिन चौधरी सहित अन्य खेल प्रशिक्षकों ने दोनों बहनों को बधाई देते हुए कहा कि आरुषि और संजना की सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

उन्होंने बताया कि दोनों खिलाड़ियों का अभ्यास के प्रति समर्पण और खेल के प्रति जुनून शुरू से ही अलग नजर आता था। क्षेत्र के खेल प्रेमियों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल हैंडबॉल खेल को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं में खेल को करियर के रूप में अपनाने की प्रेरणा भी मिलेगी।

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