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February 11, 2026

हिमाचल में डॉक्टरों ने 10 साल के बच्चे को दिया नया जीवन, मां-बाप छोड़ चुके थे ठीक होने की उम्मीद

गंभीर बीमारी से जूझ रहा था दस साल का बच्चा

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Complex Foot Surgery Doctor Ayush Sharma Tanda Medical College Hospital Kangra

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश मे कागड़ा जिला के टांडा मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यहां की डॉक्टरों की टीम ने दुर्लभ बीमारी का ऑपरेशन करके बच्चे को नई जिंदगी दी है। यह सर्जरी बहुत मुश्किल मानी जाती है, लेकिन टांडा के डॉक्टरों ने इसे पूरी तरह सफल बनाकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया।

गंभीर बीमारी से जूझ रहा था बच्चा

दरअसल, एक 10 वर्षीय बच्चा गंभीर बीमारी से जूझ रहा था- जिसके लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। जन्म से ही पैर के गंभीर विकार से जूझ रहे इस बच्चे की हड्डी रोग विभाग ने सफल सर्जरी कर न सिर्फ उसका दर्द कम किया, बल्कि उसके भविष्य की राह भी आसान कर दी है। अब वह अन्य बच्चों की तरह चलने और दौड़ने में सक्षम हो सकेगा।

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तीन घंटे चला कठिन ऑपरेशन

यह सर्जरी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष शर्मा के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला, जिसमें विशेषज्ञों की पूरी टीम ने बारीकी से काम किया। डॉक्टरों के अनुसार यह मामला सामान्य क्लब फुट से अलग और अधिक जटिल था, क्योंकि बच्चा इक्विनोकावोवरस नामक न्यूरोलॉजिकल विकार से ग्रसित था। इस स्थिति में पैर अंदर की ओर मुड़ जाता है, एड़ी ऊपर उठी रहती है और तलवा अत्यधिक धनुषाकार हो जाता है।

बच्चे को दिया नया जीवन

डॉ. आयुष शर्मा ने बताया कि बच्चा जन्म से ही पैर को जमीन पर सीधा नहीं रख पाता था। समय के साथ पैर की मांसपेशियां कठोर हो गईं और संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। ऐसे मामलों में देरी से उपचार स्थिति को और गंभीर बना देता है।

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बड़े संस्थानों में भी लिया गया परामर्श

बच्चे के स्वजन ने उसके इलाज के लिए कई बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख किया। PGI चंडीगढ़, DMC लुधियाना और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में परामर्श लिया गया। दिल्ली में उपचार भी शुरू हुआ, लेकिन अंततः परिवार ने अपने प्रदेश के टांडा मेडिकल कॉलेज पर विश्वास जताया। विशेषज्ञों की टीम ने मामले का गहन मूल्यांकन कर सर्जरी की योजना बनाई।

 

Complex Foot Surgery Tanda Medical College

टीमवर्क से मिली सफलता

डॉ. आयुष ने बताया कि यह ऑपरेशन केवल एक डॉक्टर का प्रयास नहीं था, बल्कि पूरी टीम की समन्वित मेहनत का परिणाम है। एनेस्थीसिया विभाग का विशेष सहयोग रहा, जिससे सर्जरी सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से पूरी की जा सकी।

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हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन शर्मा और यूनिट हेड डॉ. लोकेश ठाकुर के मार्गदर्शन में सर्जरी की रणनीति तैयार की गई। संस्थान के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने इस प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाए और टीम का उत्साहवर्धन किया।

सर्जरी में क्या-क्या किया गया?

  • विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन कई चरणों में किया गया।
  • कठोर हो चुकी मांसपेशियों और टेंडन्स को सावधानीपूर्वक ढीला किया गया।
  • टेंडन ट्रांसफर तकनीक के जरिए कमजोर मांसपेशियों की जगह सक्रिय मांसपेशियों को स्थानांतरित किया गया ताकि पैर का संतुलन बना रहे।
  • हड्डियों के संरेखण को ठीक करने के लिए सूक्ष्म अस्थि सुधार (बोन करेक्शन) किए गए।
  • इन सभी प्रक्रियाओं का उद्देश्य पैर को प्राकृतिक स्थिति में लाना और भविष्य में विकृति की पुनरावृत्ति रोकना था।

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सर्जरी के बाद दिखा सकारात्मक बदलाव

ऑपरेशन के बाद बच्चे के पैर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। अब उसका पैर सामान्य स्थिति में आ गया है और चिकित्सकीय देखरेख में उसे धीरे-धीरे खड़ा कर चलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि उचित फिजियोथेरेपी और नियमित फॉलो-अप से बच्चा पूरी तरह सामान्य गतिविधियां कर सकेगा।

भविष्य बदलने वाली पहल

डॉ. आयुष शर्मा ने कहा कि यह केवल एक सर्जरी नहीं थी, बल्कि एक बच्चे के जीवन की दिशा बदलने वाला प्रयास था। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े ऐसे परिवारों के लिए प्रदेश में ही उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध होना बड़ी राहत है।

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टांडा मेडिकल कॉलेज में हुई इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित किया है कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थान जटिल से जटिल मामलों का उपचार करने में सक्षम हैं। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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