#उपलब्धि

December 28, 2025

हिमाचल : 21 साल की उम्र में फ्लाइंग ऑफिसर बनी सूबेदार साहब की बेटी, देशभर में पाया 12वां रैंक

पिता जमीन पर करते हैं देश की रक्षा, बेटी आसमान से संभालेगी मोर्चा

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mandi shrejal

मंडी। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो पहाड़ भी राह बन जाते हैं। सपनों की उड़ान जब आसमान छू ले तो बेटियां भी इतिहास रच जाती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हिमाचल के मंडी जिला की होनहार बेटी श्रेजल गुलेरिया ने। मात्र 21 साल की श्रेजल गुलेरिया ने  ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न सिर्फ अपने परिवारए बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश को गौरवान्वित किया है।


मंडी जिला की बल्ह घाटी के छोटे से गांव पैड़ी से निकलकर वायुसेना की वर्दी तक का श्रेजल का सफर साबित करता है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। जिस घर में पिता देश की सीमाओं की रक्षा के लिए सेना की वर्दी पहनते हैं, उसी घर की बेटी अब आसमान में उड़कर तिरंगे की शान बढ़ाएगी। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

छोटी उम्र में बड़ी कामयाबी

श्रेजल की उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने बेहद कम उम्र में एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा को सफलता पूर्वक पास किया। अखिल भारतीय स्तर पर 12वीं रैंक हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत और लगन के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। महज 21 वर्ष की आयु में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में चयनित होकर वे उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो रक्षा सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

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नवोदय से विश्वविद्यालय तक प्रेरक यात्रा

श्रेजल की शिक्षा यात्रा भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, पंडोह से की, जहां से उन्हें अनुशासन और प्रतिस्पर्धा का माहौल मिला। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित (ऑनर्स) में बीएससी की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में एमएससी (गणित) की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने वायुसेना में चयन का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो उनकी एकाग्रता और स्पष्ट सोच को दर्शाता है।

परिवार से मिली प्रेरणा और संस्कार

श्रेजल की सफलता के पीछे परिवार का मजबूत सहारा रहा है। उनके पिता होशियार सिंह, जो भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं, ने बेटी को अनुशासन, साहस और देशभक्ति के संस्कार दिए। वहीं, माता बनीता कुमारी, जो हिमाचल पथ परिवहन निगम में जेओए के पद पर कार्यरत हैं, ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने फैसले खुद लेने की प्रेरणा दी। माता-पिता के इन मूल्यों ने श्रेजल को मानसिक रूप से मजबूत बनाया।

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प्रशिक्षण के लिए रवाना, गांव में खुशी की लहर

27 दिसंबर को श्रेजल गुलेरिया एयरफोर्स अकादमी के लिए रवाना हो चुकी हैं, जहां वे लगभग एक वर्ष का कठोर सैन्य प्रशिक्षण लेंगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनकर देश की सुरक्षा में योगदान देंगी। बेटी की इस सफलता पर पैड़ी गांव में उत्सव जैसा माहौल है। घर-घर से बधाइयां पहुंच रही हैं और लोग इसे पूरे क्षेत्र की उपलब्धि मान रहे हैं।

प्रदेश की बेटियां बन रहीं नई पहचान

श्रेजल की कहानी इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल की बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे न केवल उच्च पदों पर पहुंच रही हैं, बल्कि देश सेवा जैसे गौरवपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। श्रेजल गुलेरिया की यह उड़ान सिर्फ आसमान तक सीमित नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के हौसलों को नई ऊंचाई देने वाली है, जो देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखती हैं।

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