#हादसा
May 7, 2026
हिमाचल: छोटे भाई को डूबता देख खड्ड में कूदा 9 साल का अभिनव, बुझ गए एक घर के दो चिराग
एक साथ बुझ गए घर के दो चिराग, पिता के साथ पशु चराने गए थे
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। संगड़ाह क्षेत्र के देवामानल गांव में आठ और नौ साल के दो सगे मासूम भाइयों की खड्ड में डूबने से मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है।
घटना की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चों के खड्ड में डूबने की खबर सुनते ही उनकी मां बेसुध हो गई, जबकि पिता बदहवास हालत में सीधे घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। जब वह खड्ड के पास पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों मासूम बेटे पानी में बेसुध हालत में तैरते नजर आए।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों बच्चे अपने पिता के साथ जंगल में पशु चराने गए थे। इसी दौरान पिता कुछ दूर जानवरों को संभालने चले गए और बच्चे पास ही एक पत्थर पर खेलते रहे। अचानक पत्थर खिसक गया और एक भाई खड्ड में डूबने लगा। जिसे देख कर दूसरा भाई उसे बचाने का प्रयास करने लगा, लेकिन वह भी पानी में जा गिरा और दोनों ही पानी में डूब गए।
घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जैसे ही दोनों के शव बाहर आए, पूरे गांव में चीख.पुकार मच गई और माहौल गमगीन हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों भाई हर समय साथ रहते थे और गांव में उनकी मासूमियत सभी के दिलों में बसी हुई थी।
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यह भी जानकारी सामने आई है कि आमतौर पर बच्चों के दादा पशुओं को चराने जाते थे, लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के चलते आज पिता बच्चों को अपने साथ ले गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दिन परिवार के लिए इतनी बड़ी त्रासदी लेकर आएगा।
सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को राहत प्रदान करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि बारिश के मौसम में नदी-नालों और खड्डों के पास जाने से बचें और विशेष सावधानी बरतें, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक जलधाराएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं, खासकर बच्चों के लिए। संगड़ाह की यह त्रासदी लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक गहरी टीस छोड़ जाएगी।