#हादसा
June 18, 2026
चंबा हा*दसा: 7 मृ*तकों में पत्नी सहित बुढ़ी मां- विधवा भाभी का सहारा था चालक, पीछे छूटे दो मासूम
चालक मनोहर बूढ़ी मां, अपने और दिवंगत भाई के परिवार की निभा रहा था जिम्मेदारी
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में देर रात हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसकी टीस शायद कभी कम नहीं होगी। एक बोलेरो वाहन के गहरी खाई में गिर जाने से एक ही परिवार के छह सदस्यों समेत कुल सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन सगे भाई भी शामिल हैं, जिनकी एक साथ मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
यह दर्दनाक हादसा चंबा-मानी झुलाड़ा सड़क पर मशरूड के समीप छतरुड क्षेत्र में देर रात हुआ। बताया जा रहा है कि सभी लोग एक पारिवारिक समारोह में शामिल होकर अपने घर लौट रहे थे। रात के अंधेरे में वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा और उसमें सवार किसी भी व्यक्ति को बचने का मौका नहीं मिला।
हादसे में पंचायत सपडोट के रहने वाले मोती सिंह, देवराज और चुन्नी लाल नामक तीन सगे भाइयों की जान चली गई। इनके साथ परिवार की महिलाओं निमो देवी, कुंता देवी और अनीता की भी मौत हो गई। देखते ही देखते एक ही परिवार के छह सदस्य हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए।
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जिस घर में कुछ घंटे पहले तक हंसी-खुशी और पारिवारिक समारोह की यादें थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में इससे पहले शायद ही कभी ऐसा हादसा हुआ हो, जिसमें एक ही परिवार के इतने सदस्य एक साथ काल का ग्रास बने हों।
जानकारी के अनुसार सभी लोग अपने रिश्तेदार के यहां आयोजित मुंडन संस्कार में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे देर रात बोलेरो वाहन में सवार होकर अपने गांव लौट रहे थे। रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और गहरी खाई में जा गिरा।
सबसे दुखद बात यह रही कि रात के समय किसी को हादसे की भनक तक नहीं लगी। सुबह जब स्थानीय लोग सड़क से गुजर रहे थे, तब उन्हें नीचे खाई की ओर वाहन के कुछ टूटे हुए हिस्से दिखाई दिए। शक होने पर लोगों ने आसपास के ग्रामीणों को बुलाया और नीचे उतरकर देखा तो बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी थी। उसके आसपास सात लोगों के शव बिखरे पड़े थे। यह दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया।
इस हादसे में वाहन चालक मनोहर लाल की भी मौत हो गई। मनोहर की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की उम्मीदों के टूटने जैसी है। मनोहर लाल अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसके पिता और बड़े भाई का पहले ही निधन हो चुका था। इसके बाद घर की सारी जिम्मेदारियां उसी के कंधों पर आ गई थीं। वह अपने 7 और 12 साल के दो मासूम बच्चों, पत्नी, वृद्ध मां और अपने दिवंगत भाई की विधवा पत्नी के परिवार की जिम्मेदारी निभा रहा था।
गांव के लोगों के अनुसार मनोहर दिन-रात मेहनत कर अपने परिवार को संभाल रहा था। घर में किसी को भी किसी चीज की जरूरत होती, तो सबसे पहले मनोहर ही आगे आता था। लेकिन एक पल में हुए इस हादसे ने परिवार से उसका सबसे बड़ा सहारा छीन लिया।
मनोहर की वृद्ध मां पहले ही अपने पति और बड़े बेटे को खोने का दर्द झेल चुकी थी। वह उन दुखों से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब छोटे बेटे की मौत की खबर ने उसे अंदर तक तोड़ दिया है। जिस मां ने एक-एक कर अपने परिवार के सदस्यों को खोया, अब उसके सामने जीवन का सबसे कठिन दौर खड़ा है। घर में अब वृद्ध मां, विधवा बहू, मनोहर की पत्नी और उसके दो मासूम बच्चे ही बचे हैं। परिवार के सामने भावनात्मक ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
हादसे की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव में हर तरफ मातम का माहौल है। लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे कि कुछ घंटे पहले तक साथ बैठे, हंसते-बोलते लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे।
एक ही परिवार के छह लोगों और परिवार का सहारा बने चालक मनोहर की मौत ने चंबा की इस त्रासदी को और भी मार्मिक बना दिया है। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियां छीन ले गया, बल्कि कई परिवारों के भविष्य को भी गहरे अंधेरे में धकेल गया है। आज गांव की गलियों में सिर्फ एक ही चर्चा है—उस खाई ने सात लोगों को नहीं, बल्कि कई घरों की खुशियां हमेशा के लिए निगल ली हैं।