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August 18, 2026

हिमाचल के सरकारी स्कूल का हाल: चौथी कक्षा की छात्रा पर गिरा छत का प्लास्टर, सिर पर लगे 10 टांके

पढ़ाई के दौरान गिरा प्लास्टर बच्ची के सिर पर लगे 10 टांके

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school Plaster fell

सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों और बदहाल व्यवस्थाओं की तस्वीरें समय-समय पर सामने आती रही हैं। सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल में सामने आया एक ताजा हादसा सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राजकीय प्राथमिक पाठशाला लगनू में कक्षा के दौरान छत का भारी प्लास्टर अचानक टूटकर चौथी कक्षा की छात्रा के सिर पर जा गिरा। हादसे में छात्रा के सिर पर गहरी चोट आई और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां उसके सिर में 10 टांके लगाए गए।

कक्षा में पढ़ाई के दौरान अचानक टूटा छत का हिस्सा

मंगलवार सुबह लगनू प्राथमिक पाठशाला में अन्य दिनों की तरह कक्षाएं चल रही थीं। बच्चे अपने-अपने कक्षा कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान कमरे की छत का भारी प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। प्लास्टर का हिस्सा सीधे चौथी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा काव्या के सिर पर जा लगा। अचानक हुए इस हादसे से कक्षा में चीख-पुकार मच गई और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

 

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सिर में आई गहरी चोट, अस्पताल में लगे 10 टांके

छात्रा के सिर पर प्लास्टर गिरने से उसे गंभीर चोट लगी। स्कूल प्रशासन ने बिना देरी किए घायल बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संगड़ाह पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। चोट की गंभीरता को देखते हुए बच्ची को आगे की जांच और सिटी स्कैन के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। छात्रा के पिता कपिल कंठ के अनुसार, काव्या के सिर में 10 टांके लगाए गए हैं और उसका इलाज नाहन में चल रहा है।

हादसे ने बच्चों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

यह घटना केवल एक छात्रा के घायल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कक्षा के दौरान छत का भारी हिस्सा अचानक गिर सकता है, तो यह भवन की स्थिति और समय रहते सुरक्षा जांच नहीं होने की ओर भी संकेत करता है। गनीमत रही कि प्लास्टर का हिस्सा जिस समय गिरा, उस दौरान अन्य बच्चे उसकी चपेट में नहीं आए, वरना हादसा और बड़ा हो सकता था।

 

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30 बच्चों के लिए सिर्फ एक शिक्षक

लगनू प्राथमिक पाठशाला की स्थिति को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने अन्य व्यवस्थागत कमियों का भी मुद्दा उठाया है। पंचायत प्रधान तपेंद्र सिंह राणा के मुताबिक, स्कूल में करीब 30 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए केवल एक शिक्षक तैनात है। स्कूल में न तो चपरासी है और न ही पर्याप्त अन्य स्टाफ। स्थानीय स्तर पर इन समस्याओं को विभाग के समक्ष उठाए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

BMO ने बच्ची को नाहन रेफर किए जाने की पुष्टि की

खंड स्वास्थ्य अधिकारी सुनील कक्कड़ ने बताया कि सिर में चोट लगने के बाद एक बच्ची को उसके परिजन अस्पताल लेकर आए थे। प्राथमिक उपचार के बाद आवश्यक जांच के लिए उसे नाहन रेफर किया गया। छात्रा के सिर पर लगी चोट को देखते हुए आगे का उपचार और जांच नाहन में कराई जा रही है।

 

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सरकारी स्कूलों की बदहाली का उदाहरण

लगनू स्कूल का यह हादसा हिमाचल प्रदेश के उन सरकारी स्कूलों की स्थिति का जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। जर्जर छत, मरम्मत की जरूरत वाले भवन और स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं यदि समय रहते दूर नहीं की गईं तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूल भवन की तत्काल तकनीकी जांच करवाई जाए। साथ ही जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बच्चे की जान जोखिम में न पड़े। लोगों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।

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