#हादसा
March 20, 2025
हिमाचल: खेल-खेल में पुराने पटाखों को लगाई तीली, फूंक मारते ही हुआ जोरदार धमाका
पंडोह में पटाखों की चपेट में आकर दो बच्चे झुलसे
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पंडोह में पुराने पटाखों से खेलने के दौरान हुए धमाके में दो बच्चे झुलस गए। बुधवार सुबह पंडोह बाजार के पास ब्यास नदी के किनारे यह हादसा हुआ, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत दोनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 वर्षीय साहिल और 12 वर्षीय अर्जुन ने कहीं से पुरानी पटाखों की एक लड़ी हासिल कर ली थी। दोनों बच्चे खेल-खेल में इन पटाखों को जलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे नमी के कारण नहीं जल रहे थे।
इस पर उन्होंने पटाखों को कूड़े के ढेर में डालकर आग लगा दी और उन्हें जलाने के लिए बार-बार फूंक मारने लगे। कुछ देर बाद पटाखों की लड़ी सूख गई और अचानक जोरदार धमाका हो गया।
जोरदार धामाके के बाद साहिल का चेहरा तो आंशिक रूप से ही झुलसा मगर अर्जुन का चेहरा, बाजू व पैर बुरी तरह से झुलस गए। हालांकि, गनीमत रही कि आग ज्यादा नहीं फैली, जिससे गंभीर नुकसान होने से बचाव हो गया।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को बुलाकर घायल बच्चों को मंडी स्थित ज़ोनल अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज जारी है।
घायल बच्चों के परिवार पिछले 10-12 वर्षों से पंडोह क्षेत्र में मजदूरी कर रहे हैं। जिनमें अर्जुन पुत्र सरदार सिंह उत्तर प्रदेश के बहराइच का रहने वाला है और साहिल पुत्र मुकेश झारखंड का रहने वाला है। इस घटना के बाद उनके परिजन भी काफी चिंतित हैं। डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि बच्चों की हालत स्थिर है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
घटना की सूचना मिलते ही पंडोह पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस चौकी प्रभारी अनिल कटोच ने बताया कि बच्चों के परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि पटाखे काफी पुराने और खराब थे, जिनकी वजह से यह दुर्घटना हुई। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को पटाखों से खेलने न दें और अवैध रूप से पटाखों के भंडारण व उपयोग को लेकर सतर्कता बरतें।
बहरहाल, यह हादसा एक बार फिर पटाखों के सुरक्षित उपयोग और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देता है। बच्चों को पटाखों से दूर रखने और पुराने व खराब पटाखों का सही निस्तारण करने को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।