मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से बेहद दुखद खबर सामने आई है। औट के शालानाल क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से निर्माण कंपनी के सुपरवाइजर की मौत हो गई है।
सुपरवाइजर की दर्दनाक मौत
सुपरवाइजर की अचानक हुई मौत के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस दर्दनाक घटना से न केवल निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों में दहशत का माहौल है, बल्कि मृतक के पैतृक गांव में भी शोक की लहर फैल गई है।
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काम कर रह था बेचारा
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को 42 वर्षीय मोहर सिंह, निवासी शालानाल (टनीपरी), थलौट के पास फोरलेन परियोजना के तहत चल रहे कार्य की निगरानी कर रहा था। मोहर नाली सफाई के काम को देख रहा था- ताकि निर्माण स्थल पर जल निकासी में कोई समस्या न आए।
पहाड़ी से गिरा बड़ा पत्थर
इसी दौरान अचानक ऊपर पहाड़ी से एक विशाल पत्थर खिसककर सीधे उसकी ओर आ गिरा। घटना इतनी अचानक हुई कि मोहर सिंह को संभलने या बचने का कोई मौका तक नहीं मिल सका। पत्थर लगते ही वे गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
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साथियों ने पहुंचाया अस्पताल
हादसे के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों और कर्मचारियों ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। गंभीर हालत में मोहर सिंह को पहले कुल्लू अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें AIIMS बिलासपुर रेफर कर दिया।
AIIMS में तोड़ा दम
परिजनों और सहकर्मियों को उम्मीद थी कि शायद इलाज से उसकी जान बच सके, लेकिन देर रात इलाज के दौरान मोहर सिंह ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
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परिवार और गांव में मातम
मोहर सिंह निर्माण कंपनी में बतौर सुपरवाइजर कार्यरत था और अपने परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा था। उसकी असामयिक मौत से गांव में शोक का माहौल है। परिजन गहरे सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद फोरलेन निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। पहाड़ी इलाकों में पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है, इसके बावजूद कई बार पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी प्रणाली और काम के दौरान निगरानी को और सख्त करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
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प्रशासन ने दी फौरी सहायता
NHAI की PIU मंडी के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने हादसे की पुष्टि करते हुए इसे एक आकस्मिक घटना बताया है। वहीं औट के तहसीलदार रमेश राणा ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 25 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और भविष्य में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।



