#हादसा

June 14, 2025

हिमाचल में दरका पहाड़- 1 किमी दूर तक गिरा मलबा, हर ओर गूंजती रही चेतावनी की चीखें

कुंडी-सुनारा रोड पर लैंडस्लाइड से बंद हुआ रास्ता

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himachal landslide

चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भरमौर विधानसभा क्षेत्र के कुंडी-सुनारा मार्ग पर एक विशाल भूस्खलन हुआ। ढग नामक स्थान पर अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया और मलबा लुढ़कते हुए करीब एक किलोमीटर नीचे बह रही नदी तक जा पहुंचा। गनीमत रही कि हादसे के समय उस जगह कोई वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।

वायरल वीडियो में डर और चेतावनी

इस भूस्खलन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक चिल्लाते और सीटियां बजाते हुए लोगों को चेतावनी देता दिख रहा है। कुछ ही क्षणों बाद, पहाड़ की ऊपरी चट्टानें ढहती हैं और धूल व पत्थरों का गुबार पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र कितना संवेदनशील हो चुका है।

 

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सड़क बंद, प्रशासन मौके पर

भूस्खलन के बाद कुंडी-सुनारा संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है और दोनों ओर से गाड़ियां फंस गई हैं। लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई हैं। लेकिन लगातार रुक-रुक कर गिर रहे मलबे और चट्टानों के कारण बहाली कार्य शुरू नहीं हो पाया है। विभाग ने कहा है कि जब तक पहाड़ से गिरावट पूरी तरह बंद नहीं होती, तब तक कोई भी मशीन लगाना जान जोखिम में डालना होगा।

मौसम की करवट, मिली थोड़ी राहत

भूस्खलन के बाद चंबा जिले में अचानक मौसम ने भी करवट ली। लंबे समय से झुलसाने वाली गर्मी झेल रहे लोगों को बारिश ने राहत दी है। शुक्रवार को चंबा में तापमान 40 डिग्री पार कर गया था, लेकिन दोपहर बाद शुरू हुई हल्की बारिश से तापमान में गिरावट आई और फसलों के लिए संजीवनी मानी जा रही नमी खेतों तक पहुंची। स्थानीय युवाओं ने बारिश का आनंद लिया और कहा कि लंबे अरसे बाद राहत महसूस हुई है।

 

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जनजातीय इलाकों में बढ़ती घटनाएं

इससे पहले भी चंबा के जनजातीय क्षेत्रों में लगातार पहाड़ दरकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दस दिन पहले भरमौर-लाहल ढांक क्षेत्र में भी लैंडस्लाइड के चलते हाईवे घंटों बंद रहा था। खड़ा मुख-होली मार्ग पर भी यही स्थिति है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये घटनाएं बिना बारिश या भूकंप जैसी बाहरी वजहों के भी हो रही हैं, जिससे पहाड़ों की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।

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