ऊना। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एक फैसले ने एक ही झटके में दो हजार लोगों का रोजगार छीन लिया है। यह आंकड़ा आने वाले समय में और भी बढ़ सकता है। सुक्खू सरकार के औद्योगिक इकाईयों की सब्सिडी को वापस लेने के फैसले से प्रदेश में स्थित एक बड़ा उद्योग बंद होने जा रहा है।
स्टील निर्माता कंपनी ने अपनी यूनिट बंद करने का लिया फैसला
बिजली सब्सिडी को वापस लेने से बिजली बिलों के करोड़ों रुपए के बढ़ने वाले बोझ को देखते हुए स्टील निर्माता कंपनी सालसन स्टील ने अपने बिलासपुर जिले के ग्वालथाई औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित स्टील यूनिट को बंद करने का निर्णय लिया है। अगर कंपनी इस उद्योग को बंद कर देती है तो प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष तौर पर करीब दो हजार लोगों को रोजगार छिन्न जाएगा। कंपनी द्वारा उद्योग को बंद करने के फैसले से उसमें काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार की चिंता सताने लगी है।
उद्योगों के पलायन से खड़ी हो जाएगी बेरोजगारों की फौज
वहीं उद्योग के बंद होने की खबर के बाद औद्योगिक संघ भी सुक्खू सरकार पर बिफर गया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही अपना फैसला वापस नहीं लिया तो धीरे धीरे हिमाचल से उद्योगों का पलायन हो जाएगा और प्रदेश के लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से प्रदेश का औद्योगिक ढांचा बुरी तरह से तहस.नहस हो जाएगा।
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क्या बोले औद्योगिक संघ के पदाधिकारी
उपमंडल औद्योगिक संघ के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा, महासचिव सुरेश शर्मा, संयुक्त सचिव चंचल शर्मा, कर्ण कंग, अजय गंडोत्रा, एके अग्रवाल, अश्विनी कुमार, एमएल धीमान, कर्ण सेठी व वेद प्रकाश गोयल ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद उद्योगों के लिए बिजली दरों में दो बार बढ़ोतरी की है और अब सरकार ने बिजली पर उद्योगों को दी जा रही सबसिडी समाप्त करने का निर्णय लिया है।
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सुक्खू सरकार के फैसले से पलायन को मजबूर हुए उद्योग
औद्योगिक संघ ने हैरानी जताते हुए कहा कि सीएम सुक्खू ना जाने किसकी राय पर इस तरह के फैसले ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लोगांे को रोजगार देने वाले उद्योग ही जब पलायन कर जाएंगे तो प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ेगी। वहीं हिमाचल में पहले ही बहुत कम उद्योग हैं, ऐसे में बिजली सब्सिडी खत्म करने से वह भी पलायन करने लगे हैं।
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डिप्टी सीएम से मिला प्रतिनिधिमंडल
संघ का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से भी मिला है और मांग की है कि प्रदेश सरकार तत्काल निर्णय लेते हुए बिजली सबसिडी बहाल करने के आदेश जारी करे अन्यथा आने वाले दिनों में प्रदेश से उद्योगों का भारी पलायन देखने को मिलेगा। जिससे प्रदेश में बेरोजगारी अपने चरम पर पहुंच जाएगी।
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सुक्खू सरकार ने बिजली सब्सिडी पर लिया था बड़ा फैसला
बता दें कि सुक्खू सरकार ने अभी हाल ही में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दिया था। उन्होंने औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं को दी जाने वाली प्रति यूनिट एक रुपये की सब्सिडी पहली अक्तूबर से खत्म करने का निर्णय लिया है।
- सरकार के अनुसार 66 केवीए से अधिक सप्लाई लेने वाले उद्योगों को अब 5.66 के बजाय 6.06 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी।
- 20 केवीए के अधिक क्षमता वालों की एक रुपये की सब्सिडी पहले ही बंद की जा चुकी है।
- छोटे उद्योगों का बिजली शुल्क 11 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है।
- मध्यम उद्योगों का बिजली शुल्क 17 से घटाकर 10.5 फीसदी किया गया है।
- घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने पर 5ण्22 से 6ण्25 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करना होगा और उन्हें 1.03 रुपए यूनिट की सब्सिडी नहीं मिलेगी।
- 300 यूनिट से कम बिजली खर्च करने पर उपभोक्ताओं को 1.83 रुपए से 3.53 रुपए तक की प्रति यूनिट सब्सिडी मिलेगी।