शिमला। हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। यह बारिश का दौर अगले एक हफ्ते तक चलने वाला है। मौसम विभाग की मानें तो 17 जुलाई से लेकर 19 जुलाई तक प्रदेश के कई जिला में भारी बारिश होगी। जिसके लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों को इस दौरान एहतियात बरतने की सलाह दी है।
मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वनुामन के अनुसार 17 जुलाई से प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय होगा। ऐसे में प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना है। जबकि 15 व 16 जुलाई को प्रदेश के कुछ स्थानों पर आंधी के साथ हल्की वर्षा की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग की मानें तो हिमाचल में अगले पांच दिन भारी बारिश होगी। विभाग ने प्रदेश के ऊनाए बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन-सिरमौर जिला में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि अगले 24 घंटों में बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।
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प्रदेश में इस समय मौसम साफ बना हुआ है। बीते रोज शनिवार को भी राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में धूप खिली रही। जिससे उमस और तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि प्रदेश में पिछले दिनों हुई भारी बारिश से प्रदेश की अभी भी 12 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाई है। जबकि 6 बिजली ट्रांसफार्मर अभी भी ठप हैं। मंडी जिले में पांच, शिमला में चार और कांगड़ा में तीन सड़कें शनिवार शाम तक बंद रही हैं।
सबसे ज्यादा बारिश यहां हुई है
बताया गया है कि बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश बैजनाथ में हुई हैण् इसी के साथ क्रम में अगला नंबर धर्मशाला और फिर जुब्बड़हट्टी (शिमला) का है। वही पिछले 24 घंटों में सबसे कम तापमान शिमला का रहा, उसके पीछे इसी क्रम में सुंदरनगर और फिर भुंतर रहे हैं।
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बारिश के कारण नुकसान बढता जा रहा है
प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही नुकसान का आंकड़ा भी बढ़ने लगा है। 27 जून को मानसून ने हिमाचल में दस्तक दी थी। उसके बाद से अब तक प्रदेश को 172 करोड़ का नुकसान हो चुका है। लेकिन अब भी यह बारिश कम होने के कोई असार नहीं दिख रहे हैं जिसके चलते नुक्सान बढता जा रहा है।
पर्यटन पर भी पड़ा है बारिश का प्रभाव
प्रदेश में भारी बारिश का दौर शुरू होने के बाद से हिमाचल में सैलानियों की संख्या में कमी आई है। प्रदेश के लगभग सभी पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की संख्या ना के बराबर है। जिससे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग निराश हैं।
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