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November 25, 2025

शादी के लिए सुक्खू सरकार दे रही ₹2 लाख, बशर्ते दूसरी जाति में हो रही हो शादी

समाज से छुआछूत खत्म करना उद्देश्य

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Himachal News

शिमला। जिस देश में अंतर जातीय शादी पर कत्ल कर दिए जाते हैं, उसी देश में हिमाचल एक ऐसा राज्य है जहां अंतर जातीय शादी के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। हिमाचल की सुक्खू सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना को लेकर भारी विरोध भी हुआ था। सरकार के ही शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर सरकार के इस फैसले के खिलाफ थे।

अंतर जातीय शादी पर मिलेंगे 2 लाख

हिमाचल सरकार की इस योजना के तहत- जब दो लोग अंतर जातीय शादी करते हैं तो उन्हें 2 लाख रुपये की राशि दी जाती है। पहले ये राशि 50,000 थी लेकिन इस साल की शुरुआत में इसे बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया।

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कौन उठा सकता है योजना का लाभ ?

  • शादी करने के इच्छुक लड़का–लड़की, अलग-अलग जाति के होने चाहिए
  • दूल्हा या दुल्हन में से कोई एक हिमाचल प्रदेश का निवासी होना चाहिए
  • दंपत्ति की संयुक्त आय ₹5 लाख प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए
  • जोड़े को अपनी शादी को विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत पंजीकृत करवाना अनिवार्य है

कौन से डॉक्यूमेंट हैं जरूरी ?

  • जोड़े का बोनाफाइड हिमाचली सर्टिफिकेट
  • दूल्हा और दुल्हन के आयु प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र
  • शादी का प्रमाणपत्र
  • अगर कोई अन्य जिले का है तो संबंधित जिले से अनापत्ति प्रमाण पत्र

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कैसे करें अप्लाई ?

  • जोड़े को विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत अपनी शादी को पंजीकृत करना होगा
    विवाह पंजीकरण के बाद, जोड़े को योजना के लिए आवेदन पत्र भरना होगा, जिसे जिला समाज कल्याण कार्यालय या आधिकारिक वेबसाइट (http://esomsa.hp.gov.in/?q=intercast-marriage-application-form) से प्राप्त किया जा सकता है
  • फॉर्म डाउनलोड करें
  • जोड़े को आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज जिला समाज कल्याण कार्यालय में जमा करने होंगे
  • दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्र जोड़ों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी

समाज में छुआछूत खत्म करने की कोशिश

सरकार इस योजना के जरिए अंतर जातीय विवाह को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार इस कदम से समाज में छुआछूत को खत्म करने की कोशिश कर रही है। योजना का उद्देश्य अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपतियों को मान्यता देना और उनका सम्मान करना है।

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महिला को मिले साथी चुनने का अधिकार

इस योजना का उद्देश्य, महिलाओं को सामाजिक या पारिवारिक परिणामों के डर के बिना अपने जीवन साथी चुनने के अधिकार का प्रयोग करने के लिए सशक्त बनाना है। ये सहायता जोड़ों को शादी से जुड़े खर्चों में भी मदद कर सकती है।

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