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January 26, 2025

हिमाचल: गर्म आबोहवा में उगा दिए सेब- हरिमन शर्मा होंगे पद्मश्री से सम्मानित

सेब की एचआरएमएन-99 वैरायटी से किया था कमाल

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HARIMAN SHARMA

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के हरिमन शर्मा को सफलतापूर्वक खेती के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि हरिमन शर्मा के असाधारण प्रयास को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। जिसके बाद उन्हें अब देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। 

 गर्म इलाकों में उगाए सेब

बताते चलें कि हरिमन शर्मा ने गर्म इलाके में सेब की एचआरएमएन-99 वैरायटी की सफलतापूर्वक खेती की है और अब तक उन्हें 19 राष्ट्रीय और 15 राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं, इसके अलावा वे ‘हिमाचल एक्सीलेंस अवार्ड’ और पांच जिला और उपमंडलस्तरीय पुरस्कारों से भी नवाजे जा चुके हैं। 

 

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नेशनल और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमाया नाम

हरिमन शर्मा की मेहनत ने सेब की एचआरएमएन-99 वैरायटी को न केवल पूरे भारत में बल्कि विदेशों में भी सफलता दिलाई है। उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर में 2000 पौधे तैयार किए हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में डेढ़ लाख से अधिक पौधे महक रहे हैं। यह वैरायटी देश के 29 राज्यों में सफलतापूर्वक उगाई जा रही है। इसके अलावा जर्मनी, बांग्लादेश, साउथ अफ्रीका और नेपाल जैसे देशों में भी इस वैरायटी का उत्पादन किया जा रहा है।

 

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बिलासपुर में उगाए सेब

हरिमन शर्मा की सेब की एक बड़ी नर्सरी बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र के पनियाला गांव में स्थित है, जहां सेब के पौधों का उत्पादन किया जाता है। वे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन गांधीनगर गुजरात से जुड़े हुए हैं और इस फाउंडेशन के माध्यम से वे विभिन्न राज्यों में पौधों की डिमांड के हिसाब से वितरण करते हैं। 

मोदी के गोद लिए गांवों में भी हरिमन का योगदान

PM नरेंद्र मोदी के द्वारा गोद लिए गए गांव जयापुरा में भी हरिमन शर्मा ने सेब के 500 पौधों का वितरण किया। इससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ हुआ और उनकी कृषि गतिविधियों में सुधार आया। हरिमन शर्मा ने बताया कि उन्होंने नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और असम में कुल 1.25 लाख पौधे बांटे हैं और इस कार्य में विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय भारत सरकार ने भी सहयोग प्रदान किया है।

 

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शुरुआत में था संदेह, अब मिली सफलता

हरिमन शर्मा ने 1999 में सेब की नई किस्म पर शोध करना शुरू किया और 2006 में सफलता प्राप्त की। उस समय किसी को विश्वास नहीं था कि गर्म क्षेत्रों में सेब उगाया जा सकता है, लेकिन 2007 में जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को सेब और आम के फल भेंट किए, तो उनका काम चर्चा में आया। इसके बाद उन्होंने 2013 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आयोजित बाइब्रेट कृषि समिति उत्सव में भी भाग लिया। इस कार्यक्रम से उन्हें और उनकी तकनीकी को व्यापक पहचान मिली। 

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