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October 2, 2024

शिमला से डगशाई जेल तक -10 बार शिमला आए थे महात्मा गांधी, यहां जानें अनसुने किस्से

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शिमला। महात्मा गांधी का जब भी जिक्र होता है तो बात उनके शिमला दौरे की भी होती है। यह पहाड़ों की रानी केवल प्राकृतिक सौंदर्य का स्थल नहीं, बल्कि गांधी जी की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी रहा। शिमला की इन यात्राओं ने न केवल गांधी जी के विचारों को फैलाने में मदद की, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा को भी प्रभावित किया।

शिमला- महात्मा गांधी का कर्मक्षेत्र

गांधी जी का पहला दौरा 1905 में हुआ था, जब उन्होंने शिमला में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई। इस यात्रा के दौरान, गांधी जी ने शांति कुटीर में ठहरकर आर्य समाज के सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए महिलाओं को सशक्त करने का संदेश दिया। यह उनकी सोच का पहला संकेत था, जिसमें उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को उठाने की कोशिश की। यह भी पढ़ें : 4 शादियां…. 20 बच्चे: समुदाय विशेष पर शांता कुमार का बड़ा बयान

राजनीतिक चर्चाएं और गांधी-इरविन समझौता

गांधी जी की दूसरी यात्रा 1921 में हुई, जब उन्होंने वाइसराय लॉर्ड विलिंगडन से गांधी-इरविन समझौते पर चर्चा की। यह यात्रा एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता के मुद्दे पर सीधी वार्ता की। इस दौरान, गांधी जी ने अपनी बात स्पष्टता से रखी, जिससे ब्रिटिश हुकूमत के प्रति एक दबाव का माहौल बना। गांधी जी की शिमला में लगातार यात्राओं ने उन्हें स्थानीय नेताओं और आम जनता से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने रिज पर जनसभाओं में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को जोर देकर कहा। यह भी पढ़ें : कांग्रेस में होने जा रहा बड़ा बदलाव- नए चेहरों की होगी संगठन में एंट्री

द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव

गांधी जी की शिमला यात्राएं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी जारी रहीं। उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों का विरोध किया, जो युद्ध में भारत को शामिल करने से संबंधित थीं। उनकी छठी यात्रा के दौरान, उन्होंने वायसराय से मिलकर युद्ध के प्रभावों पर चर्चा की और भारतीय जनता की चिंताओं को व्यक्त किया। इस दौरान, गांधी जी ने अपने विचारों को मजबूती से रखा, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत को युद्ध में शामिल करना एक अन्याय है। यह दृष्टिकोण न केवल राजनीतिक बल्कि नैतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था, जिसने भारतीय जनता में जागरूकता फैलाने का कार्य किया।

डगशाई जेल की यात्रा

महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं में एक विशेष घटना डगशाई जेल की यात्रा थी। 1920 में, उन्होंने वहां बंदी आयरिश सैनिकों से मुलाकात की। गांधी जी का यह कदम उनकी मानवता के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने सैनिकों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई और उनके संघर्ष को समझने की कोशिश की। यह यात्रा उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई। यह भी पढ़ें : हिमाचल पर मेहरबान मोदी सरकार: खत्म कर दी CM सुक्खू की सबसे बड़ी परेशानी

हत्या के ट्रायल का स्थल

महात्मा गांधी की शिमला यात्राएं केवल राजनीतिक वार्ताओं तक सीमित नहीं रहीं। 1948 में उनकी हत्या के बाद, शिमला के मिंटो कोर्ट में नाथू राम गोडसे का ट्रायल हुआ। यह कोर्ट वही स्थान था जहां गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई महत्वपूर्ण वार्ताओं में भाग लिया। गोडसे को 21 जून 1949 को फांसी की सजा सुनाई गई, जो एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश था।

महात्मा गांधी की विरासत

महात्मा गांधी की शिमला यात्राएं उनके जीवन के कई पहलुओं को उजागर करती हैं। उन्होंने शिमला को एक ऐसे स्थल के रूप में स्थापित किया जहां उन्होंने अपने विचारों को न केवल भारतीय जनता के बीच बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के समक्ष भी प्रस्तुत किया। उनकी यात्राओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक बातचीत नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाना भी था। यह भी पढ़ें : हिमाचल : घास काटने पर हुआ विवाद- मां और बेटे ने शख्स पर किए कई वार हाल ही में लेखक विनोद भारद्वाज ने "गांधी इन शिमला" पुस्तक में गांधी जी की शिमला यात्राओं का विस्तृत वर्णन किया। इस पुस्तक में बापू की शिमला में बिताई गई समय की घटनाओं को शामिल किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोया जा सके। महात्मा गांधी की शिमला यात्राएं स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय हैं। उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान समाज को जागरूक किया, राजनीतिक वार्ताओं में भाग लिया और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनकी यह यात्राएं न केवल इतिहास का हिस्सा हैं, बल्कि आज भी हमें प्रेरणा देती हैं कि कैसे एक व्यक्ति अपने विचारों और दृढ़ संकल्प से समाज में बदलाव ला सकता है।

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