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October 6, 2026

गुटखा,पान मसाला भर रहा सुक्खू सरकार का खाली खजाना, हिमाचल का बढ़ा राजस्व; जानें कहां होंगे खर्च

स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल हो सकता है पैसा

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Himachal Pradesh news

शिमला। गुटखा और पान मसाला खाने वालों की जेब से निकलने वाले टैक्स का अब हिमाचल प्रदेश को भी फायदा मिला है। केंद्र सरकार ने इन उत्पादों पर लगाए गए सैस से जुटाई गई रकम में से हिमाचल को 180 करोड़ रुपये दिए हैं। देशभर से इस सैस के जरिए करीब 4,200 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। अब हिमाचल में इस राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और लोगों को तंबाकू व गुटखा जैसे हानिकारक उत्पादों से दूर रखने से जुड़े कामों में किया जा सकता है।

सैस लगाने का मकसद सिर्फ पैसा जुटाना नहीं

पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर सैस लगाने का मकसद सरकार के लिए राजस्व जुटाना ही नहीं, बल्कि लोगों को इनके सेवन से दूर करना भी है। तंबाकू और दूसरे हानिकारक पदार्थों के सेवन से कई गंभीर बीमारियां होती हैं, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल हो सकता है पैसा

इन उत्पादों से जमा होने वाली राशि का कुछ हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जाना अहम माना जा रहा है। हिमाचल में भी तंबाकू और गुटका सेवन के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में 180 करोड़ रुपये की यह राशि प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

NHM ने केंद्र के सामने उठाया था मामला

हिमाचल प्रदेश के नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने केंद्र सरकार के सामने इस मामले को उठाया था। NHM ने पान मसाला और गुटका पर लगाए गए सैस से मिलने वाले राजस्व में हिमाचल की हिस्सेदारी देने की मांग की थी। इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भी भेजा गया था। अब प्रदेश को 180 करोड़ रुपये की राशि मिली है।

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देशभर से जुटाए गए 4,200 करोड़ रुपये

केंद्र सरकार ने पान मसाला और गुटका पर सैस लगाकर देशभर से करीब 4,200 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस राशि में राज्यों को भी हिस्सा दिया जा रहा है। इसी के तहत हिमाचल के हिस्से में 180 करोड़ रुपये आए हैं। इससे प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी।

गुटका-पान मसाला से कई गंभीर बीमारियों का खतरा

गुटका और पान मसाला का सेवन मुंह के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इन उत्पादों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने के पीछे लोगों को इनके सेवन से दूर करने का उद्देश्य भी है। अब इसी सैस से हिमाचल को मिली राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किए जाने की उम्मीद है।

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