शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना शिक्षा विभाग के तीन उच्च अधिकारियों को महंगा पड़ गया है। इन अधिकारियांे को अब हाईकोर्ट ने जेल भेजने तक के आदेश दे दिए हैं। तीनों उच्चाधिकारियों को पहले 10 जुलाई को कोर्ट में सरेंडर करने को कहा गया है, वहीं से इन्हें जेल भेजा जाएगा।
यह भी पढ़ें: हमीरपुर में मंच पर रो पड़े कांग्रेस प्रत्याशी पुष्पेंद्र वर्मा, बोले-मेरी क्या गलती
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। शिक्षा विभाग के जिन अफसरों पर जेल जाने की तलवार लटक गई है, उनमें शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक और एक डिप्टी डायरेक्टर शामिल हैं।
कोर्ट में सरेंडर करने को कहा
दरअसल हिमाचल हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से जुड़े एक संशोधित पेंशन मामले की सुनवाई करते हुए पर्टीकुलर आदेश जारी किए थे, लेकिन शिक्षा विभाग ने कोर्ट के उन आदेशों का पालन नहीं किया। जिस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए अब शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को जेल भेजने के सख्त आदेश दे दिए हैं।
यह भी पढ़ें: BJP का साथ देने वालों को धमका रहे CM सुक्खू, ठेकेदारों से कर रहे वसूली
हाईकोर्ट ने तीनों अफसरों को 10 जुलाई को तय नियमों के अनुसार सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। अफसरों को हाईकोर्ट में ही सरेंडर करना होगा। वहां से उन्हें तय प्रक्रिया के अनुसार सिविल जेल भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्य सचिव को सबसिस्टेंस एलाउंस की व्यवस्था करने को कहा
हाईकोर्ट ने अपने निर्देशों के बारे में मुख्य सचिव को भी अवगत करवा दिया है और निर्देश दिए हैं कि शिक्षा विभाग के संबंधित अफसरों के कारावास यानी जेल की अवधि में निर्वाह भत्ते यानी सबसिस्टेंस एलाउंस की व्यवस्था करें।
यह भी पढ़ें: शराब खत्म हुई तो बोतल लेने निकल पड़े चाचा-भतीजा, खाई में जा गिरी गाड़ी
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दिए हैं। अब जेल जाने से बचने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आज और कल में कोई कारगर कदम उठाना होगा।
हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों की नहीं हुई थी अनुपालना
हिमाचल हाईकोर्ट में लक्ष्मण दास वर्सेज हिमाचल सरकार केस की सुनवाई चल रही थी। मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व में कुछ निर्देश दिए थे।
यह भी पढ़ें: खेलते खेलते पानी के टैंक में जा गिरी दो साल की बच्ची, नहीं बचाया जा सका
अब एग्जीक्यूशन याचिका में पाया गया कि उन आदेशों का पालन नहीं हुआ और ना ही कोई अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुआ। जिसे कोर्ट की अवहेलना माना गया। जिसके बाद ही न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति रंजन शर्मा ने सख्त आदेश जारी किए।
रिवाइज्ड पेंशन का है मामला
हाईकोर्ट में लक्षमण दास नामक याचिकाकर्ता की पेंशन के रिवीजन के मामले की सुनवाई चल रही थी। पूर्व में हाईकोर्ट ने फैसला लक्षमण दास के हक में दिया था।
यह भी पढ़ें: हिमाचल भाजपा के नेता को पुलिस ने पकड़ा: 27 लोगों के साथ पार्टी कर रहा था
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित आदेश कर दिए थे, लेकिन ड्राइंग एंड डिस्परसिंग ऑफिसर यानी डीडीओ ने इस केस यानी पेंशन को काउंट करने वाले मामले को अकाउंटेंट जनरल कार्यालय को नहीं भेजा। जिसके चलते याचिकाकर्ता को संशोधित पेंशन नहीं मिली।
यह भी पढ़ें: हिमाचल की सड़कों से गायब होंगे 15 साल पुराने वाहन,परिवहन विभाग ने कर ली तैयारी