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June 14, 2025
डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री केंद्र से लाए करोड़ों की सौगात- 14 साल बाद इस क्षेत्र को मिलेगी राहत
फिन्ना सिंह सिंचाई परियोजना को मिली नई संजीवनी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की वर्षों पुरानी बहुप्रतीक्षित फिन्ना सिंह सिंचाई परियोजना को अब नई ऊर्जा मिली है। डिप्टी मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के प्रयासों से केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए 55.51 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी है, जो प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना यानी PMKSY के अंतर्गत त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के तहत दी गई है।
डिप्टी सीएम अग्निहोत्री ने जानकारी दी कि ये राशि न सिर्फ स्वीकृत हुई है, बल्कि जारी भी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार ने सरकार बनते ही इस परियोजना को प्राथमिकता में रखा और केंद्र के समक्ष इसका पक्ष मजबूती से रखा। इसके लिए दिल्ली में संबंधित केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों से कई बार बैठकें की गईं।
यह परियोजना मुख्यतः कांगड़ा जिले के नूरपुर उपमंडल और आसपास की 15 पंचायतों के किसानों के लिए बनाई जा रही है। इससे लगभग 4000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे करीब 25,000 परिवार लाभान्वित होंगे। साथ ही चंबा जिले की सीमावर्ती कुछ पंचायतों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के तहत लाहड़ू गांव के पास चक्की पुल पर एक डैम बनाया जा रहा है, जहां एक सुरंग के माध्यम से जल संग्रह किया जाएगा। यह पानी एक लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग और 11.7 किलोमीटर लंबी वितरण प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पहुंचेगा। इससे क्षेत्र की कृषि उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा होगा। फिन्ना सिंह सिंचाई परियोजना की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी, जब इसकी अनुमानित लागत 204 करोड़ रुपये थी।
लेकिन वर्षों की देरी और सरकारों के बदलते रवैये के कारण अब इस परियोजना की लागत 646 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2023 में डिप्टी सीएम ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर परियोजना को गति देने का आग्रह किया था, जिसके बाद अगस्त 2024 में 300 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। अब इस नई किस्त के साथ परियोजना के पूरा होने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

फिन्ना सिंह, जिनके नाम पर यह परियोजना है, ब्रिटिश कालीन भारतीय सेना में हवलदार थे। वे कांगड़ा जिले के नयाड़ी गांव के निवासी थे। बर्मा में तैनाती के दौरान उन्होंने अंग्रेजों द्वारा बनाए गए सिंचाई सिस्टम को देखा और यह सपना संजोया कि उनके क्षेत्र में भी ऐसी योजना शुरू होनी चाहिए। उन्होंने 1977 के करीब इस विषय को राज्य सरकारों के सामने उठाया, लेकिन दशकों तक यह केवल प्रस्तावों तक ही सीमित रही। वर्ष 2011 में पहली बार यह योजना जमीन पर उतरी।