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August 21, 2025
कर्मचारियों के लंबित DA पर तपा सदन, सीएम सुक्खू ने बताया कब जारी करेंगे किश्त; आप भी जान लें
सीएम सुक्खू के जवाब से विपक्ष नहीं हुआ संतुष्ट वेल में आकर की नारेबाजी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का गुरुवार को सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) की लंबित किश्तों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर दिया। सदन के भीतर और बाहर विपक्ष ने सरकार को वादाखिलाफी और कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप लगाया।
बीजेपी विधायक सतपाल सत्ती द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और एरियर को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि बजट में घोषित डीए की किश्त को शीघ्र जारी किया जाएगा। उन्होंने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वर्ष 2018-19 में जब राज्य को 12,000 करोड़ रुपये की राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) मिली थी, तब भी कर्मचारियों को एरियर का भुगतान नहीं किया गया। वहीं उनकी सरकार को अब केवल 3,200 करोड़ रुपये की आरडीजी मिल रही है। राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर होते ही डीए की राशि जारी कर दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार केवल राजनीतिक बयानबाज़ी कर रही है और सदन में गंभीर सवालों से बच रही है। ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान मई में डीए जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन अगस्त समाप्ति की ओर है और कर्मचारियों को अभी तक कुछ नहीं मिला। इस वादाखिलाफी के विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे को विधानसभा की कार्यप्रणाली से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस प्रश्न पर उन्हें तीसरा अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) सवाल पूछने का अवसर नहीं दिया गया, जो कि विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार भाजपा सरकार पर 10,000 करोड़ की देनदारी छोड़ने का आरोप लगाते हैं, लेकिन क्या वीरभद्र सरकार द्वारा छोड़ी गई देनदारियों को भाजपा सरकार ने नहीं चुकाया था?
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सदन में एक सकारात्मक पहल के तहत हिमाचल प्रदेश के निर्माता और पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार को भारत रत्न देने की मांग भी गूंजी। नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से यह मांग उठाई। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार का हिमाचल प्रदेश के गठन और विकास में ऐतिहासिक योगदान रहा है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
डॉ. परमार का जन्म 4 अगस्त 1906 को सिरमौर रियासत में हुआ था। वह न केवल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे, बल्कि 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल को एक पहचान दिलाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से ही 25 जनवरी 1971 को हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
इसके साथ ही विधानसभा में आज बीजेपी विधायक जेआर कटवाल द्वारा लाई गई गैर-सरकारी संकल्प के तहत इको टूरिज्म नीति और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण पर भी चर्चा होनी है। राज्य की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह विषय विशेष रूप से अहम माना जा रहा है।