शिमला। सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि सोमवार को शिव जी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 16 सितंबर, दिन सोमवार को शिव की आराधना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। आइए जानते हैं इस दिन की पूजा विधि और विशेष नियम।
1. प्रातःकाल स्नान और शुद्धता:
सोमवार की पूजा से पहले प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
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2. शिवलिंग का अभिषेक:
भगवान शिव की पूजा का मुख्य अंग उनका अभिषेक है। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, और गुलाब जल चढ़ाकर अभिषेक करें। अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। इससे भगवान शिव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है।
3. बिल्वपत्र अर्पण:
भगवान शिव को बिल्वपत्र अत्यंत प्रिय होते हैं। पूजा के दौरान शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाले बिल्वपत्र चढ़ाएं। ध्यान रखें कि पत्तियां टूटी-फूटी न हों। इसके साथ ही, सफेद फूल, धतूरा, और भस्म भी अर्पित करें।
4. धूप और दीप जलाना:
अभिषेक के बाद भगवान शिव के समक्ष घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। पूजा के दौरान "महामृत्युंजय मंत्र" या "रुद्राष्टक" का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति और भय से मुक्ति मिलती है।
5. प्रसाद और भोग:
भगवान शिव को मिठाई, फल और विशेष रूप से गाय का दूध और घी का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद को सभी में बांटें। प्रसाद ग्रहण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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6. सोमवार व्रत का महत्व:
अगर आप सोमवार का व्रत रखते हैं, तो दिनभर फल आहार करें और शाम को शिव जी की आरती के बाद व्रत खोलें। कहा जाता है कि सोमवार का व्रत रखने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस प्रकार 16 सितंबर को भगवान शिव की पूजा करते समय इन विशेष बातों का ध्यान रखकर आप भोलेनाथ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। शिव जी की आराधना से जीवन में शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।