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August 25, 2024

हिमाचल में श्रीकृष्ण का अद्भुत मंदिर, उल्टी मुरली पकड़े विराजमान हैं कान्हा

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हमरीपुर। देवभूमि हिमाचल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर धूम मची हुई है। देवभूमि हिमाचल में भगवान श्रीकृष्ण के कई अद्भुत मंदिर स्थापित हैं। इन मंदिरों में श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीला देखने को मिलती है। आज हम आपको श्रीकृष्ण भगवान के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे- जिसका ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है।

भगवान श्रीकृष्ण का अद्भुत मंदिर

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी एक अभिन्न हिस्सा है। इस मंदिर को मुरली मनोहर मंदिर और एक लख टकिया मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह भी पढ़ें: हिमाचल: 30 साल के अंकित ने किसी से कुछ नहीं कहा और छोड़ गया दुनिया

उल्टी पकड़ी है हाथों में मुरली

इस मंदिर में मौजूद श्री कृष्ण जी की मुरली का इतिहास बहुत अद्भुत है। यह पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण का इकलौता ऐसा मंदिर है- जहां आज भी श्रीकृष्ण ने हाथों में उल्टी मुरली पकड़ी हुई है। इस मंदिर की यह विशेषता भक्तों के लिए एक आस्था और श्रद्धा का विषय है।

उल्टी मुरली की मान्यता

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने खुद इस मुरली को उल्टा पकड़ा हुआ है और यह उनकी लीला का एक भाग है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें भगवान का आशीर्वाद हासिल होता है। यह भी पढ़ें: मोदी सरकार ने निकाला OPS का तोड़: UPS को मंजूरी- हिमाचल के कर्मचारी भी जरूर ध्यान दें

कान्हा की अनोखी लीला

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण ने यहां आकर अपनी मुरली को उल्टा पकड़ लिया था। कहा जाता है कि भगवान ने इस स्थान को अपनी विशेष लीला के लिए चुना था। तभी से उनकी मूर्ति में यह अद्वितीय विशेषता जुड़ गई।

क्या है मंदिर से जुड़ी मान्यता?

मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस मंदिर का महत्व खासकर उन लोगों के लिए अधिक है- जो भगवान कृष्ण की अद्वितीय लीलाओं और चमत्कारों में आस्था रखते हैं। यह भी पढ़ें: चुराई हुई कार में शहर भर घूमे दो यार, भागने के चक्कर में खाई में जा गिरे

मंदिर से जुड़ी कथा

यह मंदिर महाराजा संसार चंद की नगरी सुजानपुर टीहरा में मौजूद है। इस मंदिर का निर्माण लगभग 400 साल पहले पूर्व राजा संसार चंद ने किया था। कहा जाता है कि जिस समय मुरली मनोहर मंदिर में श्रीकृष्ण की मूर्ति की स्थापना की जा रही थी।- उस समय महाराजा संसार चंद ने मूर्ति की स्थापना करने से इंकार कर दिया था। महाराजा ने पुजारियों से भगवान श्री कृष्ण के मौजूद होने का सबूत मांगा। उन्होंने सुबह तक पुजारियों से जवाब मांगा और जवाब ने देने की सूरत में दंड देने की बात कही। इसी के चलते पुजारी रातभर इसी चिंता में डूबे रहे कि कैसे राजा को श्रीकृष्ण के होने का सबूत दें। यह भी पढ़ें: पेपर लीक केस: जांच से तंग आई मुख्य आरोपी उमा आजाद, बोली- नहीं जीना चाहती मगर अगली सुबह सब पुजारी भगवान श्रीकृष्ण का चमत्कार देखकर दंग रह गए। पुजारियों ने बताया कि पाया कि श्रीकृष्ण की मुरली की दिशा बदल गई थी। मुरली सीधी तरफ होने की बजाय उल्टी तरफ थी। राजा भी यह देखकर हैरान हो गए। इसके बाद उन्होंने मूर्ति की स्थापना करने की अनुमति दे दी।

एक लख टकिया मंदिर

पुजारियों ने बताया कि शाम के समय मुरली की दिशा सीधी थी, लेकिन अब मुरली विपरीत दिशा में है. जिसके बाद राजा ने भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना की। इस मंदिर का निर्माण महाराजा संसार चंद ने एक लाख रुपए से करवाया था। यही कारण है कि इस मंदिर को एक लख टकिया मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह भी पढ़ें: खराब वित्तीय हालातों के बीच सुक्खू सरकार की कैबिनेट बैठक आज

कब है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि 26 अगस्त को सुबह 3 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 26 अगस्त यानी सोमवार को मनाया जाएगा।

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पूजन का शुभ मुहूर्त 26 अगस्त की दोपहर 12 बजे से 27 अगस्त की दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पारण 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट के बाद किया जाएगा।

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