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June 20, 2024

वट सावित्री व्रत कल: एक क्लिक में जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म के लोग कई तरह के व्रत रखते हैं। हर व्रत का अपना एक अलग महत्व होता है। सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत साल में दो बार रखा जाता है और 15 दिन के अंतराल में रखा जाता है।

दो बार रखा जाता है व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के अमावस्या और पूर्णिमा तिथि के दिन इस व्रत का पालन किया जाता है। बीती 6 जून को वट सावित्री अमावस्या व्रत रखा गया था। अब इस साल का दूसरा और अंतिम वट सावित्री पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। यह भी पढ़ें : देहरा की जंग हुई रोचक, भाजपा-कांग्रेस को सताने लगा भितरघात का डर

सुहागिनें रखती हैं यह व्रत

मान्यताओं के अनुसार, व्रत वाले दिन भगवान विष्णु और वट वृक्ष की पूजा-अराधना करने से विशेष लाभ मिलता है। यह व्रत हर साल सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं।

कब है वट सावित्री पूर्णिमा व्रत

पंचांग के अनुसार, वट सावित्री पूजा अभिजीत मुहूर्त में की जाती है। इस साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 21 जून यानी कल सुबह 7 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और 22 जून सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर खत्म होगी। इस साल वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 21 जून यानी कल रखा जाएगा। इस दिन शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है। शुक्ल योग शाम 6 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। फिर इसके बाद शुक्ल योग शुरू हो जाएगा।

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क्या है व्रत का महत्व?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने मृत्यु के देवता भगवान यम को भ्रमित कर उन्हें अपने पति सत्यावान के प्राण को लौटाने पर विवश किया था। इसी के चलते सुहागिनें अपने पति की सकुशलता एवं दीर्घायु की कामना से वट सावित्री व्रत का पालन करती हैं।

क्यों होती है वट वृक्ष की पूजा?

हिंदू धर्म में वट वृक्ष को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, बरगद के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं। ऐसे में जो भी वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा-अराधना करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह भी पढ़ें : डॉ राजेश का ऐलान: भरेंगे दो-दो पर्चे, देहरा की सियासत में आया नया मोड़

जानिए व्रत की पूजा विधि

वट सावित्री व्रत वाले दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें और फिर नहाकर साफ कपड़े पहनें। इस दिना सुहागिनों का सोलह श्रृंगार करना अति शुभ माना जाता है। इस दिन सुहागिनें शुद्ध जल और कच्चे दूध से वट वृक्ष को सींच कर पेड़ की सात बार परिक्रमा करती हैं और कच्चा सूत व लाल मौली भी लपेटती हैं। ऐसा करने से सुहागिनों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सावित्री व्रत करने वाली महिलाओं का सुहाग अमर रहता है।

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