नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पाठ-पूजा और व्रत को काफी महत्व दिया गया है। प्रत्येक व्रत की अपनी एक अलग विधि और मान्यता है। यूं तो साल के सभी मंगलवार हनुमान जी के माने जाते हैं लेकिन सावन के मंगलवार की अलग मान्यता है। जहां सावन के सोमवार भगवान शंकर को समर्पित होते हैं वहीं, सावन के मंगलवार माता पार्वती को समर्पित हैं। दरअसल, सावन के मंगलवार को किए जाने वाले व्रत को ही मंगला गौरी व्रत कहा जाता है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। साथ ही कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी को पाने के लिए यह व्रत करती हैं।
कब हैं मंगला गौरी के व्रत?
पहला मंगला गौरी व्रत आज ही के दिन यानी 23 जुलाई 2024 को है। दूसरा मंगला गौरी व्रत 30 जुलाई 2024, तीसरा मंगला गौरी व्रत 6 अगस्त 2024 को है, और चौथा व आखिरी मंगला गौरी व्रत 13 अगस्त 2024 को है।
क्या है मंगला गौरी व्रत की खासियत?
मंगला गौरी व्रत के सौभाग्य से जुड़े होने की वजह से नव-विवाहिताएं भी इस दिन गौरी शंकर और हनुमान जी की पूजार्चना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति-पत्नी के बीच रिश्ते मधुर होते हैं।
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यह व्रत संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है। साथ ही मंगला गौरी व्रत के दिन कुछ विशेष उपाय करने से व्यक्ति की कुंडली में मौजूद मंगल दोष से मुक्ति मिल जाती है।
मंगला गौरी व्रत मंत्र
कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्।
नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्।।
क्या है मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
इस व्रत में मंगलवार को प्रातः जल्दी उठकर नहाने के बाद भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके बाद व्रत करने का संकल्प लेकर, देवी मंगला गौरी यानी माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करते हैं। माता की मूर्ति को लाल कपड़े पर विराजमान करना चाहिए।
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इस पूजा में फूल-मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, लड्डू, सुहाग की सामग्री, 16 चूड़ियां और मिठाई आदि चढ़ाई जाती हैं। पूजा में चढ़ाई गई सभी चीजें 16 की संख्या में होती हैं। इसके पीछे मान्यता यह है कि, ये व्रत सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का वरदान प्रदान करता है।
क्या है मंगला गौरी की व्रत कथा?
एक समय की बात है एक शहर में एक व्यापारी रहता था। जिसका नाम धर्मपाल था। उसकी पत्नी बहुत खूबसूरत थी और उसके पास काफी संपत्ति भी थी। मगर उनकी कोई संतान नहीं होने के कारण वे काफी दु:खी रहा करते थे। ईश्वर की कृपा से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति तो हुई लेकिन, वह अल्पायु था।
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उनके पुत्र को श्राप मिला था कि 16 वर्ष की आयु में सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी। संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई। युवती जब कुंवारी थी तो उन दिनों वह माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी। माता मंगला की कृपा से उसके पति की आयु 100 साल की हो गई थी।
जो व्रत नहीं कर सकते, उनके लिए....
जो महिलाएं इस दिन उपवास नहीं कर सकती वह मां मंगला गौरी की पूजा कर सकती हैं। आप इस व्रत को परिवार की खुशी के लिए लगातार 5 वर्षों तक कर सकते हैं।