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June 17, 2024

निर्जला एकादशी कल: व्रत टूट गया तो करें ये उपाय, ये नियम हैं जरूरी

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और व्रत को काफी मान्यता दी जाती है। हिंदू धर्म ग्रंथों में एकादशी व्रत को परम पवित्र और फलदायी व्रत के रूप में व्रणित किया गया है। भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत हर महीने में दो बार आता है। यानी साल में कुल 24 एकादशी के व्रत होते हैं। मगर इन सभी एकादशी में से एक निर्जला एकादशी व्रत का काफी महत्व होता है।

कहा जाता है देवव्रत

निर्जला एकादशी के व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और वैकुंठ को गए थे। जिसके चलते इस व्रत को भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। यह भी पढ़ें: हिमाचल: परिवार के उतरते ही खाई में गिरी कार, पंजाब के पर्यटक की गई जान

कब है निर्जला एकादशी का व्रत

यह व्रत काफी कठिन होने के साथ-साथ काफी प्रभावशाली भी माना जाता है। व्रत वाले दिन 24 घंटे खाने और पानी का सेवन किए बिना इसका पालन किया जाता है। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून यानी कल है।

निर्जला एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत का पालन करता है, उन्हें सभी 24 एकादशी व्रत का फल मिलता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।

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इन नियमों का रखें ध्यान

निर्जला एकादशी के व्रत के दिन तुलसी को स्पर्श या जल अर्पित ना करें। तामसिक चीजों और चावल का सेवन ना करें। व्रत के दिन ना ही जमीन पर सोएं और ना ही बाल और नाखून कटवाने चाहिए।

व्रत टूटने पर क्या करें

कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति का गलती से यह व्रत टूट जाता है तो उसे सबसे पहले स्नान कर भगवान विष्णु की मूर्ति को दूध, दही, चीनी और शहद के मिश्रण से बने पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए।

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इसके बाद भगवान विष्णु से क्षमा-याचना कर इस मंत्र मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहींन जनार्दन। यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे।। ऊँ श्री विष्णवे नम:। क्षमा याचनाम् समर्पयामि।। का जाप करना चाहिए। इसके अलावा भगवान विष्णु को समर्पित स्तोत्रों का भक्तिपूर्वक पाठ करें। भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का यथाशक्ति तुलसी की माला से जप करें। भगवान विष्णु के मंदिर में पुजारी को पीले वस्त्र, फल, मिष्ठान्न,धर्मग्रन्थ, केसर, हल्दी, चने की दाल आदि वस्तु दान करें। साथ ही गाय, ब्राह्मण और कन्याओं के लिए भोजन की व्यवस्था करें।

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