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August 9, 2024

हिमाचल के इस मंदिर में मीराबाई के साथ विराजतें हैं श्री कृष्ण, देते हैं साक्षात दर्शन

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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश को देवी-देवताओं की भूमि कहा जाता है। यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं-जिनका इतिहास बहुत पुराना है। देवभूमि में श्री कृष्ण के भी कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। आमूमन हम देखते हैं कि मंदिरों में भगवान श्री कृष्ण के साथ राधा रानी की मूर्ति स्थापित की हुई होती है। मगर आज हम आपको हिमाचल प्रदेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे- जिसमें श्री कृष्ण की मूर्ति के साथ राधा रानी नहीं बल्कि मीरा की मूर्ति स्थापित की गई है। यह भी पढ़ें: हिमाचल: रिहायशी मकान में मिला नशा, खेप के साथ तीन हुए अरेस्ट

पुरी दुनिया में इकलौता ऐसा मंदिर

आपको बता दें कि यह मंदिर हिमाचल के नूरपुर के प्राचीन किला मैदान में स्थित है। भगवान श्री बृजराज स्वामी का यह मंदिर बेहद ही खास मंदिर है। यह मंदिर पूरी दुनिया में इकलौता ऐसा मंदिर हैं- जहां श्री कृष्ण की मूर्ती मीरा बाई के साथ स्थापित है।

श्री कृष्ण के साथ स्थापित हैं मीरा बाई

मंदिर में स्थापित यह दोनों मूर्तियां काफी अलौकिक और आकर्षक हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही प्रेम संबंधों में मधुरता आती है। जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती है। यह भी पढ़ें: टांडा मेडिकल कॉलेज की कैंटीन में शौचालय के पानी का इस्तेमाल, स्वास्थ्य से खिलवाड़

क्या है मंदिर का इतिहास?

कहा जाता है कि 1629 में जब चितौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर नूरपुर के राजा जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ वहां पहुंचे। यहां जिस महल में राजा जगत सिंह और उनके पुरोहितों को रात को आराम करने के लिए ठहराया गया- उसी के पास एक मंदिर था। राजा जगत सिंह को रात के समय उस मंदिर से घुंघरुओं और संगीत की आवाजें सुनाई दीं। इसी बीच जब उन्होंने महल की खिड़की से बाहर झांका तो उन्होंने मंदिर में एक महिला को श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन गाते नाचते हुए देखा। मंदिर में श्री कृष्ण और मीरा बाई की मूर्तियां साक्षात थी। इसके बाद जब राजा ने यह पूरी बात अपने पुरोहितों को बताई तो वापसी के वक्त उन्होंने इन मूर्तियों को उपहार स्वरूप मांग लिया। वहीं, चितौडग़ढ़ के राजा ने उन्हें खुशी-खुशी दोनों मूर्तियां भेंट कर दी। इसके बाद राजा जगत सिंह ने यह दोनों मूर्तियां अपने दरबार के मंदिर में स्थापित कर दी। तब से लेकर आज तक इस मंदिर में रोजना पूजा-पाठ होता है और रात के समय मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। यह भी पढ़ें: हिमाचल में तबाही के बाद लगे भूकंप के झटके, रही इतनी तीव्रता

मीराबाई करती थीं मूर्ति की पूजा

मंदिर में स्थापित श्री कृष्ण की इस मूर्ति का संबंध उनकी अनन्य प्रेम भक्त मीराबाई से बताया जाता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि मध्यकाल में मीराबाई ने प्रभु भक्ति को नया आयाम दिया था। वह खुद को भक्त नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमिका बताती थीं। मीरा बाई की प्रेमभक्ति को प्रभु श्रीकृष्ण के बराबर सम्मान और भाव दिया जाता है। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित श्री कृष्ण की यह वही मूर्ति है- जिसकी पूजा-अर्चना मीरा बाई किया करती थीं। इसी मूर्ति के साथ वह बातें करती थीं और भक्ति में लीन हो कर इसके आगे नाचती-गाती थीं।

मंदिर में आते हैं श्री कृष्ण

मान्यता है कि इस मंदिर में हर रात भगवान श्री कृष्ण आते हैं। मंदिर बंद करने से पहले मूर्तियों के समक्ष शयनासन, चरण पादुकाएं और एक गिलास पानी से भरा रखा जाता है। सुबह जब मंदिर का दरवाजा खोला जाता है तो शयनासन पर सिलवटें होती हैं और पानी की गिलास गिरा होता है। चरण पादुकाएं भी अपने स्थान से सुबह हिली हुई मिलती हैं। माना जाता है कि रात में श्रीकृष्ण व मीराबाई यहां विश्राम करते हैं। यह भी पढ़ें: ITI में दाखिला लेने आई थी तमन्ना, कमरे में लट.की मिली, पिता ने मकान मालिक पर…

400 साल पुराना अनोखा पेड़

इस मंदिर में मौलश्री का पेड़ भी चार सदी पूर्व ही रोपा गया था। चित्तौड़गढ़ के राजा से भेंट स्वरूप मिला यह पेड़ तब लंबे सफर के कारण सूख गया था। मगर मंदिर परिसर में इसकी प्राण-प्रतिष्ठा होने के बाद यह पेड़ फिर से हरा हो गया। इस पेड़ की विशेषता यह भी है कि इस पेड़ में फल नहीं आता है सिर्प फूल उगते हैं। कई साल से इस पेड़ का एक हिस्सा खूब हरा -भरा है, जबकि आधा पेड़ सूख गया है।

कैसे पहुंचे इस मंदिर तक?

बता दें कि श्री बृजराज मंदिर तक सड़क और हवाई मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ़ से ऊना- तलवाड़ा होकर जसूर से नूरपुर तक सड़क मार्ग से भी श्रद्धालु आ सकते हैं। पठानकोट-कांगड़ा मार्ग से सरलता से यहां पर बस, ट्रेन, टैक्सी या अपने वाहन से पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से कांगड़ा के गग्गल एयरपोर्ट और पठानकोट स्थित एयरपोर्ट तक फ्लाइट ली जा सकती है।

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