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August 22, 2024

चमत्कारी मंदिर- जिसकी झोली में आता है अखरोट -उसे होती है संतान सुख की प्राप्ति

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मंडी। हिमाचल प्रदेश को देवी-देवताओं की भूमि कहा जाता है। यहां के लोगों की देवी-देवताओं और प्राचीन मान्यातओं से अटूट आस्था जुड़ी हुई है। ऐसी ही आस्था का एक जीता-जागता उदाहरण मंडी जिला के पधर उपमंडल के हिमरी गंगा स्थान पर देखने को मिलता है।

गर्भ से निकली है विशाल जलधारा

यहां घोघरधार के गर्भ से एक विशाल जलधारा निकली है- जो कि हिमरी गंगा के नाम से जानी जाती है। हिमरी गंगा में भादो महीने की 20 प्रवीष्ठे को स्नान करने का विशेष महत्व है। लोगों की देव हुरंग नारायण और देवी हिमरी गंगा के प्रति अटूट आस्था है। यह भी पढ़ें: बैग में किताबों की जगह ठूंसे कपड़े, ट्यूशन के बहाने घर से फुर्र हुए 3 बच्चे

हर मनोकामना होती है पूरी

मान्यता है कि इस स्थान पर सच्चे मन से की गई हर मनोकामना पूरी होती है। यह मंदिर निसंतान दंपतियों की गोद भराई के लिए बहुत प्रसिद्ध हो चुका है। यहां पर हर साल भादो में मेला आयोजित किया जाता है- जिसमें हजारों की संख्या में लोग आते हैं।
छड़ी से निकाला था पानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि हिमरी गंगा का उदगम देव हुरंग नारायण ने अपने मनुष्य रूप में की थी। यह जगह चौहार घाटी के देवता हुरंग नारायण की कथा से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि हुरंग नारायण बाल्यकाल में इस स्थान में गांव वालों के पशुओं को चराने के लिए लाते थे। जिस स्थान पर देव पशु चराते थे, वहां पर पानी नहीं था। उन्होंने पशुओं को हांकने वाली छड़ी से शक्ति द्वारा यहां पर पानी निकाला था।

शक्ति से बंद कर दिया पानी

यहां देव पशुओं को पानी पिलाते थे और फिर शक्ति ने पानी को बंद कर देते थे। इस बात से गांव के सभी लोग बहुत हैरान थे। उनके पशु घर आकर पानी नहीं पीते थे। ऐसे में ग्रामीणों ने इसका कारण जानना चाहा। फिर एक दिन ग्रामीणों ने चुपके से उनका सारा रहस्य जान लिया। यह भी पढ़ें: IGMC में नशा बेचने आई थी महिला, 1 किलो से अधिक चरस समेत हुई अरेस्ट हालांकि, उसी समय देव मूर्छित हो गए और हुरंग गांव में विराजमान हो गए। फिर वह वहां से लुप्त हो गए और चौहार घाटी में मूर्ति/रघ रूप में विराजमान हो गए। इस स्थान में पानी की अमृत धारा लगातार बहने लगी।

निसंतान महिलाओं के लिए वरदान

हिमरी गंगा के साथ शिव मंदिर भी स्थित है। यह स्थान निसंतान महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। निसंतान महिलाएं पानी के स्रोत में अखरोट फेंकती हैं और नीचे की तरफ अपने दुपट्टे को लेकर खड़ी हो जाती हैं। भाग्य से जिस महिला के पास अखरोट आकर गिरता है- उसे संतान प्राप्ति होती है।

माने जाते हैं सबसे प्रभावशाली देवता

आपको बता दें कि देव हुरंग नारायण को चौहार घाटी के प्रमुख देवता के रूप में पूजा जाता है। हुरंग नारायण घाटी के सबसे बड़े और प्रभावशाली देवता माने जाते हैं। घाटी में कोई भी शुभ कार्य इनकी पूजा के बिना शुरू नहीं किया जाता है।

झेलना पड़ता है देवता का प्रकोप

देव हुरंग नारायण धूम्रपान के सख्त खिलाफ हैं। गलती से भी अगर धूम्रपान करने वाला व्यक्ति देवता के रथ के पास जाए तो उसे जुर्माना अदा करना पड़ता है। वहीं, अगर कोई जान-बूझ कर ऐसा करे तो उसे देवता का प्रकोप झेलना पड़ता है। यह भी पढ़ें:  हिमाचल: स्क्रब टायफस वाले कीड़े ने मां-बेटे को काटा, दोनों स्वर्ग सिधारे राष्ट्रीय उच्च मार्ग मनाली-पठानकोट पर नारला में हिमरी गंगा के झरने से भी लोगों की कई आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमरी गंगा की पहाड़ियों के बीच दिखने वाली बड़ी-बड़ी दरारे रंग नारायण का रास्था था। यही देव हुरंग अपने पशुओं को पानी भी पिलाते थे।

अधूरा है हिमरी गंगा तीर्थ स्थल

दरारों के बीच पड़े घास के ढेर में कहा जाता है कि यह देव नारायण ने रखे थे। वहीं, इस जलप्रपात के बगल में एक प्राचीन गुफा भी है- जिसमें हिमरी गंगा तीर्थ का जल भीतर ही भीतर चल कर गुफा में निकलता है। मान्यता है कि इस गुफा में स्नान किए बिना हिमरी गंगा तीर्थ स्थल अधूरा है।

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