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March 24, 2026

हिमाचल: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन, आज होगी मां कालरात्रि की विशेष पूजा- जानें विधि

नकारात्मक शक्तियां होती है दूर

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Maa Kalratr Navratri 2026

शिमला।  हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और खास माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां स्वयं पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। माता को प्रसन्न करने के लिए कौन से मंत्र का जाप करें आइये जानते हैं। 

नकारात्मक शक्तियां होती है दूर

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। इसे अन्य रूपों से अलग इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह रूप अत्यंत उग्र और प्रभावशाली है। भक्तों का यह विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से माता की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

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कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का रूप उनके नाम की तरह ही डरावना और भयंकर है। उनका रंग गहरा काला है, जो अज्ञान और भय को नष्ट करने का प्रतीक माना जाता है। उनके तीन नेत्र हैं, जो ब्रह्मांड की हर दिशा को देखने की शक्ति दर्शाते हैं। मां के चार हाथ हैं

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दो हाथों में खड्ग और कांटा हैं, जबकि बाकी दो हाथ भक्तों को वरदान और अभय का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उनकी सवारी गधा है। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि ने यह उग्र रूप रक्तबीज राक्षस का संहार करने के लिए धारण किया था, ताकि संसार को भयमुक्त किया जा सके और सभी जीव नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रहें।

पूजा का महत्व और लाभ

धार्मिक ग्रंथों और पंडितों के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सच्चे मन से उनकी आराधना करने पर साधक को अनेक प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। खासकर तंत्र-मंत्र साधना करने वाले लोग उनकी विशेष पूजा करते हैं।

माना जाता है कि मां कालरात्रि की कृपा से भक्तों को यह लाभ होता है- 

  • जीवन में भय और डर समाप्त होते हैं।
  • नकारात्मक शक्तियाँ और बुरी आत्माएँ दूर रहती हैं।
  • भक्तों को साहस, सुरक्षा और आत्मविश्वास मिलता है।
  • अकाल मृत्यु और अप्रिय घटनाओं से रक्षा होती है।

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मां को प्रसन्न करने का तरीका

मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन देवी को गुड़ और उससे बने पकवान अर्पित करते हैं। यह भोग जीवन से दुख, बाधा और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

 

विशेष रूप से यह माना जाता है कि श्रद्धा और विधिपूर्वक अर्पित किया गया भोग मां को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लाता है। भक्तों का यह अनुभव है कि गुड़ का भोग अर्पित करने से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और उनके परिवार और व्यवसाय में समृद्धि आती है।

 

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मंत्रों का जाप

मां कालरात्रि की पूजा में निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है, जिससे भक्तों की मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भक्तों को मानसिक और आत्मिक सुरक्षा प्राप्त होती है। यह साधना उनके जीवन में नकारात्मक प्रभावों को कम करती है और उन्हें साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती है।

  • ॐ कालरात्र्यै नम:
  • ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ कालरात्रि दैव्ये नम:

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