#धर्म

February 16, 2026

हिमाचल का रहस्यमयी मंदिर: यहां धरती से प्रकट हुए थे शिव-पार्वती, जानें भूत-प्रेतों की कथा

यहां पर होता था भूत-प्रेतों का वास 

शेयर करें:

Akshaina Mahadev Temple

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में स्थित अक्षैणा महादेव मंदिर एक बार फिर शिवरात्रि मेले को लेकर चर्चा में है। हर साल की तरह इस बार भी यहां 18 से 20 फरवरी तक तीन दिन का भव्य मेला आयोजित किया जा रहा है। इस मेले में न केवल पालमपुर बल्कि पूरे जिला कांगड़ा और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता के कारण इस मेले का महत्व और भी बढ़ जाता है।

मंदिर से जुड़ी रोचक कहानी

अक्षैणा महादेव का मंदिर कांगड़ा जिला के उपमंडल में स्थित है। इस  मंदिर की अपनी एक अनोखी कहानी है, जिसे लोग आज भी श्रद्धा से सुनते हैं। बताया जाता है कि कई वर्ष पहले कुरल गांव के एक किसान को खेत में हल चलाते समय भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियां मिली थीं। 

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल BREAKING- पशु मित्र भर्ती पर सरकार ने लगाई ब्रेक, विवाद के बाद रोकी प्रक्रिया

मूर्तियों पर मिले खून के निशान

खास बात यह है कि जब ये मूर्तियां निकलीं तो उन पर खून जैसे निशान दिखाई दिए। इतना ही नहीं, आज भी इन मूर्तियों पर हल के निशान साफ देखे जा सकते हैं। इस घटना के बाद इलाके में यह बात तेजी से फैल गई। बड़े-बड़े धार्मिक गुरुओं और ज्योतिषियों से सलाह ली गई। उनकी राय के बाद इन मूर्तियों को अक्षैणा महादेव में स्थापित करने का फैसला लिया गया। शुरुआत में यहां मिट्टी का मंदिर बनाकर मूर्तियों की स्थापना की गई।

यहां पर होता था भूत-प्रेतों का वास 

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले इस जगह को अच्छा नहीं माना जाता था। कहा जाता था कि यहां भूत-प्रेतों का वास है और लोग शाम ढलने के बाद इधर आने से डरते थे। लेकिन जैसे ही भगवान शिव-पार्वती की मूर्तियों की स्थापना हुई, माहौल पूरी तरह बदल गया। धीरे-धीरे यहां साधु-संत और महात्मा आकर रहने लगे और यह स्थान एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाने लगा।

 

यह भी पढ़ें : HRTC बस में इयरफोन लगाए बैठी थी युवती- टिकट मांगने पर कंडक्टर को जड़ा थप्पड़, हुआ विवाद

मंदिर परिसर के चारों ओर खींची सीमा रेखा 

बाद में मंदिर परिसर के चारों ओर सीमा रेखा खींची गई और जगह को व्यवस्थित रूप दिया गया। मिट्टी का जो मंदिर पहले बनाया गया था, उसे समय के साथ पक्का कर दिया गया। परमार वंश के लोगों ने मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी संभाली, जो आज भी इस कार्य को निभा रहे हैं। अब यह मंदिर श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

मेले को मिला जिला और राज्य स्तर का दर्जा

मंदिर में लगने वाले इस मेले को लेकर पहले भी कई घोषणाएं हुईं। वर्ष 2003 में भाजपा सरकार के समय तत्कालीन विधायक विपिन परमार ने इसे जिला स्तरीय मेला बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उस समय यह योजना पूरी नहीं हो सकी। बाद में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी इसे दर्जा दिलाने की बात कही गई। अंततः 18 फरवरी 2017 को प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर इस मेले को राज्य स्तरीय दर्जा दे दिया।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: सड़क हाद.से ने छीन लिए फौजी के प्राण, घर पहुंची तिरंगे में लिपटी देह- पत्नी बेसुध

इस साल का कार्यक्रम

इस वर्ष जिला स्तरीय महाशिवरात्रि महोत्सव 18 फरवरी से शुरू होकर 20 फरवरी तक चलेगा। मेला कमेटी के अनुसार 18 फरवरी को सुबह 11 बजे मेले का शुभारंभ देवपाल परमार द्वारा किया जाएगा। 20 फरवरी को दोपहर 3 बजे समापन समारोह आयोजित होगा, जिसमें विधायक विपिन सिंह परमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

 

यह भी पढ़ें : नशेड़ियों के निशाने पर हिमाचल के अस्पताल- सिरिंज चोरी के मामले में 10 अरेस्ट, बढ़ी निगरानी

 

मेले के दौरान विभिन्न सरकारी विभाग अपनी प्रदर्शनियां लगाएंगे, ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी मिल सके। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

खेल प्रतियोगिताएं में मिलेगी 

मेले में खेल प्रतियोगिताओं का भी खास आकर्षण रहेगा। लोक नृत्य प्रतियोगिता में पहले स्थान पर आने वाले को 13,000 रुपये और दूसरे स्थान पर 8,000 रुपये का नगद पुरस्कार दिया जाएगा।

 

यह भी पढ़ें : मां चिंतपूर्णी ने पूरी की मुराद- भक्त ने दान किया 25 तोले सोने का मुकुट, 40 लाख है कीमत

 

कबड्डी प्रतियोगिता में विजेता टीम को 11,000 रुपये और उपविजेता को 5,000 रुपये के साथ स्मृति चिन्ह दिए जाएंगे। सभी खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए 17 फरवरी शाम 5 बजे तक एंट्री करानी होगी। खिलाड़ियों और मेहमानों के लिए खाने-पीने की उचित व्यवस्था भी की गई है।

इलाके में उत्साह का माहौल

मेले को लेकर आसपास के गांवों और पालमपुर क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेला केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। तीन दिनों तक यहां भक्तों की भीड़, भजन-कीर्तन, खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देंगे। 

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख