शिमला। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में कार्तिक मास की पूर्णिमा की अनंत महिमा लिखी गई है। इसे देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। देव दीपावली के दिन पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है।
देव दीपावली का व्रत दिवाली के 15 दिन बाद आता है। मान्यता है कि देव दीपावली के दिन सभी देवता पृथ्वी पर आकर गंगा के तट पर दीप जलाकर दिवाली का उत्सव मनाते हैं। आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि इस बार देव दीपावली का व्रत कब रखा जाएगा। साथ ही बताएंगे पूजा का शुभ मुहूर्त, नियम और कथा के बारे में।
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देव दीपावली की कथा?
देव दीपावली को भगवान शिव की उपासना और उनकी विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक एक राक्षस का वध किया था, जो त्रिलोक पर आतंक मचा रहा था। इस विजय पर देवताओं ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं। इसीलिए इसे "देवताओं की दिवाली" कहा जाता है।
देव दीपावली का व्रत
इस साल कार्तिक मास की पूर्णिमा का व्रत आज रखा जाएगा।
- पूर्णिमा : सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर मध्य रात्रि 2 बजकर 59 मिनट तक रहेगी।
- स्नान दान का शुभ मुहूर्त : सुबह 4 बजकर 58 मिनट से सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक था।
- सत्यनारायण पूजा रा मुहूर्त : सुबह 6 बजकर 44 मिनट से सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक है।
- देव दीपावली का शुभ मुहूर्त : प्रदोष काल शाम 5 बजकर 10 मिनट से रात 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
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देव दीपावली की परंपराएं
देव दीपावली के दिन गंगा स्नान और दीपदान की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और गंगा घाटों पर दीये जलाते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है, विशेष रूप से वाराणसी के दशाश्वमेध, अस्सी और राजेंद्र प्रसाद घाट पर जब हजारों दीपक एक साथ जलाए जाते हैं। इस दिन लोग अपने घरों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी दीये जलाकर भगवान की आराधना करते हैं।
देव दीपावली का महत्व
देव दीपावली केवल धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि यह समाज में एकता, प्रेमऔर शांति का संदेश भी देता है। देव दीपावली आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है। दीप जलाना प्रकाश का प्रतीक है- जो अंधकार, अज्ञान और पाप का नाश करता है। इस दिन लोग अपने घरों और मंदिरों में दीप जलाकर भगवान से आशीर्वाद की कामना करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रयास करते हैं।
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देव दीपावली व्रत के नियम
देव दीपावली व्रत के लिए कुछ विशेष नियम और परंपराएं होती हैं, जिनका पालन करके भक्त देवताओं की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस व्रत में स्नान, पूजा, दीपदान और भक्ति भाव से देवताओं का स्मरण करना महत्वपूर्ण माना जाता है।