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October 25, 2026
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: ढोल-नगाड़ों के साथ पुलिस थाने पहुंचे देवता अजयपाल, जानिए 100 साल पुरानी मान्यता
कुल्लू पुलिस थाना में देवता अजयपाल की अनोखी हाजिरी
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में चल रहा अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव कई मायनों में खास है। यहां जहां सैकड़ों देवी-देवताओं का महाजमघट लगता है, वहीं सदियों से चली आ रही देव परंपराएं आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। ढालपुर मैदान में देव मिलन के भव्य दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ ऐसी परंपराएं भी निभाई जा रही हैं, जिनके पीछे रोचक लोककथाएं और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हैं। इन्हीं में से एक परंपरा है देवता अजयपाल का ढोल-नगाड़ों के साथ कुल्लू पुलिस थाना पहुंचना। देवता का थाने में आना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और हर किसी के मन में यह सवाल उठा कि आखिर देवता अजयपाल हर साल पुलिस थाना क्यों पहुंचते हैं?
कुल्लू दशहरा के दौरान ढालपुर मैदान में अलग-अलग क्षेत्रों से देवी-देवता अपने देवलुओं और हरियानों के साथ पहुंचते हैं। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज, देव मिलन और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। इसी देव परंपरा के तहत देवता अजयपाल भी अपने हरियानों के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर कुल्लू पुलिस थाना पहुंचे। थाना परिसर में कुछ देर विश्राम करने के बाद देवता वहां से भगवान रघुनाथ के दर्शन और उनसे मिलने के लिए रवाना हो गए। देवता का पुलिस थाना पहुंचना दशकों से चली आ रही उस परंपरा का हिस्सा है, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।

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देवता अजयपाल के पुजारी नूप राम के अनुसार, देवता अजयपाल को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, देवता को सूखे और अकाल से राहत दिलाने वाला माना जाता है। यही वजह है कि क्षेत्र के लोगों की देवता के प्रति गहरी आस्था है। पुजारी के अनुसार, देवता अजयपाल दशहरा उत्सव के दौरान अपने देवलुओं के साथ कुल्लू थाना परिसर पहुंचते हैं और वहां थोड़ी देर विश्राम करते हैं। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी है।
देवता अजयपाल के कुल्लू पहुंचने को लेकर भी एक पुरानी लोककथा प्रचलित है। पुजारी नूप राम के मुताबिक, देवता अजयपाल अपनी पत्नी के साथ कांगड़ा जिले के बीड़ भंगाल से कुल्लू आए थे। शुरुआत में उन्होंने एक दिन काइस धार में बिताया, लेकिन वहां का स्थान उन्हें अनुकूल नहीं लगा। इसके बाद वे पीज पहुंचे और फिर बागन गांव में विराजमान हुए। स्थानीय मान्यता के अनुसार, उस समय इलाके में सूखे की स्थिति थी और लोग फसलों को लेकर चिंतित थे। देवता के वहां विराजमान होने के बाद अच्छी बारिश हुई और फसल भी बेहतर हुई। इसके बाद क्षेत्र में देवता का मंदिर बनाया गया। यह कथा आज भी स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और देव परंपरा से जुड़ी हुई है।
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देवता अजयपाल के कुल्लू पुलिस थाना पहुंचने के पीछे एक और दिलचस्प लोककथा प्रचलित है। पुजारी नूप राम के अनुसार, यह घटना करीब 100 साल पुरानी बताई जाती है, जब अंग्रेजों का शासन था। उस समय खांपू नाम का एक व्यक्ति देवता का कटियाला यानी भक्त था। वह गांवों से देवता के भंडार के लिए अनाज एकत्रित करने का काम करता था। बताया जाता है कि खांपू ने एक व्यक्ति की जमानत दी थी, लेकिन वह व्यक्ति पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने खांपू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उसे लेकर कुल्लू थाने की ओर जा रही थी, तभी रास्ते में उसके हाथ में लगी एक हथकड़ी टूट गई। जब उसे थाने पहुंचाया गया, तो वहां दूसरी बेड़ी भी कथित तौर पर अपने आप टूट गई।

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लोककथा के अनुसार, खांपू के साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने उससे पूछा कि उसके पीछे कौन चल रहा है। खांपू ने जवाब दिया कि उसके पीछे कोई नहीं है, जबकि पुलिसकर्मियों को उसके पीछे एक व्यक्ति चलता हुआ दिखाई देने की बात कही जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, वह व्यक्ति देवता अजयपाल थे, जो अपने भक्त के साथ चल रहे थे।
कहा जाता है कि हथकड़ियों और बेड़ियों के टूटने की घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने इसे देवता का चमत्कार माना और खांपू को छोड़ दिया। बाद में खांपू को वही व्यक्ति मिल गया, जिसकी जमानत लेने के कारण उसे गिरफ्तार किया गया था। लोककथा के अनुसार, खांपू उसे पुलिस के पास ले गया। इस तरह उस समय की घटना देवता अजयपाल की आस्था से जुड़ी कहानी का हिस्सा बन गई। यह विवरण स्थानीय मान्यता और पुजारी द्वारा सुनाई गई लोककथा पर आधारित है; इसकी स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
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पुजारी नूप राम के मुताबिक, देवता अजयपाल अपने भक्त खांपू के लिए कुल्लू थाना पहुंचे थे और वहां कुछ देर विश्राम किया था। उसी घटना की याद में आज भी दशहरा उत्सव के दौरान देवता का पुलिस थाना पहुंचना परंपरा के रूप में जारी है। इसी कारण हर साल देवता अपने देवलुओं के साथ थाने पहुंचते हैं और कुछ देर ठहरने के बाद आगे की धार्मिक यात्रा पर निकलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की खासियत सिर्फ देवी-देवताओं की विशाल उपस्थिति तक सीमित नहीं है। यहां हर देवता से जुड़ी अपनी परंपराएं, मान्यताएं और लोककथाएं हैं, जिन्हें स्थानीय समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है। कहीं देव मिलन श्रद्धालुओं को भावविभोर करता है, तो कहीं देवता अजयपाल की तरह अनूठी परंपराएं लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं। ढोल-नगाड़ों के साथ देवता अजयपाल का पुलिस थाना पहुंचना इसी जीवंत देव संस्कृति की एक झलक है। करीब एक सदी पुरानी मानी जाने वाली इस परंपरा के माध्यम से कुल्लू के लोग अपनी लोकआस्था और सांस्कृतिक विरासत को आज भी सहेजे हुए हैं।