नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कई तरह के व्रत रखे जाते हैं। इन व्रतों की तिथि पंचांग के अनुसार तय की जाती है। हर व्रत को पूरी विधि के साथ रखा जाता है। हिंदू धर्म में चतुर्थी व्रत का अपना एक अलग महत्व है। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए किया जाता है।
चतुर्थी व्रत हर महीने में दो बार किया जाता है। इस बार आषाढ़ मास का पहला चतुर्थी व्रत 25 जून यानी कल है। मंगलवार को चतुर्थी होने से इसे अंगारक चतुर्थी भी कहा जाता है।
हर महीने में होते हैं दो व्रत
धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्री गणेश चतुर्थी तिथि के स्वामी हैं। चतुर्थी तिथि में ही भगवान श्री गणेश ने जन्म लिया था। हर महीने में दो चतुर्थियां आती हैं। जो कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में होती हैं। कुछ लोगों इन दोनों चतुर्थियों पर व्रत रखते हैं।
दुखों से मिलता है छुटकारा
कहा जाता है कि मंगलवार और चतुर्थी के योग में श्री गणेश, हनुमान और मंगल ग्रह की विशेष पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की पूजा और व्रत करने से इंसान को सभी प्रकार के दुखों और संकटों से छुटकारा मिलता है।
दिनभर रहते हैं निराहार
व्रत वाले दिन लोग दिनभर निराहार रहते हैं। फिर शाम को चांद के दर्शन करने के बाद गणेश पूजा करके व्रत पूरा करते हैं। यह व्रत दूध और शकरकंद खा कर खोला जाता है। इसके बाद तिल, गुड़ आदि को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
जानिए पूजा की विधि
व्रत वाले दिन भगवान श्री गणेश को जल और दूध का स्नान करवाकर हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। इसके बाद चंदन का तिलक लगाएं और दूर्वा, चावल, जनेऊ समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। फिर लड्डू और फलों का भोग लगाएं।
12 नाम वाले मंत्र का करें जप
व्रत वाले दिन भगवान श्री गणेश के 12 नाम वाले मंत्र ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:। का कम से कम 108 बार जप करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करें।
9 ग्रहों के सेनापति हैं मंगल देव
ज्योतिष विद्या में मंगल देव को 9 ग्रहों का सेनापति माना गया है। यह ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। अंगारक चतुर्थी में सबसे पहले भगवान श्री गणेश और फिर मंगल की पूजा करनी चाहिए।
ध्यान रहे कि मंगल ग्रह ही पूजा शिवलिंग रूप में की जाती हैं। ऐसे में व्रत वाले दिन शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूलों के साथ-साथ लाल फूल भी चढ़ाएं। इसके अलावा मंगल देव को लाल गुलाल चढ़ाएं।
चतुर्थी वाले दिन खासतौर पर मंगल देव की भात पूजा की जाती है। इस पूजा में शिवलिंग का पके हुए चावलों से श्रृंगार करना चाहिए। साथ ही ऊँ अं अंगारकाय नम: मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
कुंडली में है मंगल दोष
ज्योतिष विद्या के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें मंगलवार को लाल मसूर का दान करना चाहिए। हनुमान की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।