#राजनीति
November 28, 2025
CM सुक्खू बनाम जयराम ठाकुर : सदन के बाहर जोरदार हंगामा, चल रही नारेबाजी
केंद्र सरकार पर भड़की सुक्खू सरकार, विपक्ष ने भी जड़े कई आरोप
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच माहौल गरमा गया। सदन की सीढ़ियों और परिसर में दोनों दलों के विधायक आमने-सामने नजर आए।
एक ओर भाजपा विधायकों ने कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों को लेकर सरकार का घेराव किया, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष ने केंद्र सरकार पर आर्थिक मदद रोकने के आरोप लगाते हुए बीजेपी को निशाने पर लिया।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा विधायकों ने विधानसभा की सीढ़ियों पर प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथों में तख्तियां उठाकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। तख्तियों पर लिखा था-
विधायकों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा कि हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और चिकित्सा भत्ते के भुगतान में देरी हो रही है, जिससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विपक्ष ने यह भी दावा किया कि पेंशन भुगतान में लगातार देरी से वरिष्ठ नागरिकों की परेशानियां बढ़ रही हैं।
उधर, दूसरी ओर कांग्रेस विधायकों ने भी विधानसभा परिसर में नारेबाजी की। उन्होंने केंद्र सरकार पर हिमाचल को आर्थिक मदद न देने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं को घेरा। सत्तापक्ष का कहना है कि राज्य में वित्तीय संकट केंद्र की वजह से गहरा रहा है, जिसके चलते कई विकासात्मक और कर्मचारी संबंधी योजनाएँ प्रभावित हुई हैं।
सत्तापक्ष के नारे साफ तौर पर केंद्र और बीजेपी नेतृत्व को लक्ष्य कर रहे थे। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि यदि केंद्र उचित आर्थिक सहायता दे, तो कर्मचारियों और पेंशनरों के मुद्दे तुरंत हल किए जा सकते हैं।
हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सुबह विधानसभा पहुंचने से पहले जोरावर स्टेडियम भी गए। यहां उन्होंने 4 दिसंबर को प्रस्तावित भाजपा की रैली की तैयारियों की समीक्षा की। उनका दावा है कि रैली में बड़ी संख्या में कर्मचारी, पेंशनर और पार्टी समर्थक शामिल होंगे तथा मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। इस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी जयराम ठाकुर के साथ मौजूद रहे। उन्होंने रैली के मंच, व्यवस्थाओं और सुरक्षा की तैयारियों का जायजा लिया।
सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत जिस तरह आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी से हुई, उससे संकेत मिल रहा है कि आगामी दिनों में सदन का तापमान और बढ़ सकता है। कर्मचारियों की समस्याओं और आर्थिक संकट का मुद्दा इस बार सत्ता–विपक्ष की राजनीति का मुख्य केंद्र बनता दिख रहा है।