#राजनीति
October 12, 2026
अनुराग ठाकुर का तंज, सुक्खू सरकार ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को बना दिया अपनी राजनीति का अड्डा
दिल्ली प्रदर्शन के दौरान हिमाचल भवन में पहुंचे थे कांग्रेस के 250 से अधिक नेता
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हमीरपुर। दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के जमावड़े को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने इस मामले को लेकर कांग्रेस और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल कांग्रेस ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को अपनी राजनीति का अड्डा बनाकर रख दिया है। अनुराग ठाकुर ने सवाल उठाया कि प्रदेश के लोगों की सुविधा और सरकारी कामकाज के लिए बने भवन का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए क्यों किया जा रहा है? उनके इस बयान ने दिल्ली में कांग्रेस की मौजूदगी और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के नेता पहले से ही संवैधानिक संस्थाओं को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं और अब दिल्ली में हिमाचल भवन को भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को लेकर हिमाचल भवन का नाम सामने आया हो।
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सांसद ने एआई समिट के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पहले हिमाचल भवन और फिर हिमाचल प्रदेश में संरक्षण दिया गया। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
मंडी हाउस स्थित हिमाचल भवन में एक बार फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी को लेकर अनुराग ठाकुर ने आपत्ति जताई। उनके अनुसार, भवन में करीब 200 से 250 लोगों के जुटने से आम लोगों को परिसर में आने-जाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल भवन प्रदेश के उन लोगों के लिए है, जो सरकारी कामकाज और अन्य आवश्यक कार्यों के सिलसिले में दिल्ली पहुंचते हैं। ऐसे में इस परिसर को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाना उचित नहीं है।
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सांसद ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि सरकारी भवनों का इस्तेमाल जनहित के लिए होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों को संचालित करने के लिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या हिमाचल भवन अब प्रदेश के लोगों की जरूरतों से ज्यादा कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है? अनुराग ठाकुर ने कहा कि सार्वजनिक परिसरों की गरिमा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इनके इस्तेमाल में आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अनुराग ठाकुर ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सुक्खू सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस सरकार से पूछा कि जब प्रदेश के सामने आर्थिक दबाव और जनता से जुड़े कई मुद्दे हैं, तो सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त सतर्कता क्यों नहीं बरती जा रही है?
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उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियां जनता के संसाधनों से संचालित होती हैं और उनका उपयोग पारदर्शिता तथा जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। उनके मुताबिक, हिमाचल भवन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के लोगों और सरकारी कार्यों को सुविधा देना है। इसे राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाए जाने से भवन के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं।
हिमाचल कांग्रेस के नेताओं का दिल्ली पहुंचना भी इस राजनीतिक घटनाक्रम का अहम हिस्सा है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। इस विरोध के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों के दिल्ली पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस इस प्रदर्शन को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाने और लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बता रही है, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के दिल्ली दौरे और हिमाचल भवन में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अनुराग ठाकुर के हमले से प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज होने के संकेत हैं। भाजपा सांसद ने हिमाचल भवन के इस्तेमाल को मुद्दा बनाकर कांग्रेस सरकार की कार्यशैली और सरकारी संसाधनों के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस का दिल्ली दौरा चुनावी प्रक्रिया के विरोध से जुड़ा है। ऐसे में हिमाचल भवन में कार्यकर्ताओं के जमावड़े को लेकर उठे सवाल अब प्रदेश की राजनीति में एक नए विवाद का रूप लेते नजर आ रहे हैं।
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अनुराग ठाकुर के आरोपों के केंद्र में यही सवाल है कि क्या हिमाचल भवन प्रदेश की जनता की सुविधा के लिए है या कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का ठिकाना बनता जा रहा है? इस मुद्दे पर भाजपा ने सरकार को घेरने का प्रयास किया है, जबकि घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस का पक्ष भी राजनीतिक बहस में अहम रहेगा।