शिमला। हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति अपनी दृढ़ता को स्पष्ट करना था, खासकर तब जब उनकी हाल की टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था।
विवादों में घिरे विक्रमादित्य
बता दें कि विक्रमादित्य सिंह ने हाल ही में विवादास्पद बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी दुकानों पर पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। इस बयान ने कांग्रेस के भीतर हड़कंप मचा दिया और बाद में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जिसके बाद मंत्री विक्रमादित्य दिल्ली पहुंचे और आलाकमान से स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता महसूस हुई।
नहीं कर रहे पार्टी की खिलाफत
सूत्रों के अनुसार, मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने खरगे से मुलाकात में अपनी स्थिति को स्पष्ट किया और यह बताया कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा को लेकर उठे सवालों का समाधान किया है। यह धारणा गलत है कि हम उत्तर प्रदेश मॉडल का अनुसरण कर रहे हैं।
इन नेताओं से कर चुके मुलाकात
इस बैठक से पहले विक्रमादित्य सिंह ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी सिंह के साथ बातचीत की थी। वेणुगोपाल ने सिंह को बताया कि पार्टी राहुल गांधी के "नफरत से प्यार" के संदेश में विश्वास करती है और किसी भी सदस्य को पार्टी की नीतियों और विचारधाराओं के खिलाफ जाने की अनुमति नहीं है। वहीं, विक्रमादित्य सिंह ने भी इस मामले में बातचीत करते हुए बताया कि उनके द्वारा कहे गए शब्द अलग थे। मीडिया ने इसे उत्तर प्रदेश के साथ जोड़ विवाद खड़ा किया है।
प्रदेश की सियासत में उथल-पुथल
बता दें कि विक्रमादित्य सिंह के बयानों के बाद हिमाचल में भी गुटबाजी शुरू हो गई है। कहीं कुछ नेता विक्रमादित्य के साथ है तो कुछ ने विक्रमादित्य को नसीहत दे डाली है। जिसके बाद से हाईकमान द्वारा पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल को सुलझाने का प्रयास किया गया।
खबर तो ये भी आ रही है कि कांग्रेस के अंदर की सियासत और उसकी संगठनात्मक एकता को बनाए रखने के लिए हाईकमान ने विक्रमादित्य को दिल्ली बुलाया है।