#राजनीति
February 10, 2026
हिमाचल कैबिनेट से पहले दिल्ली चले CM : हाईकमान से करेंगे अहम चर्चा, मंत्रियों की बढ़ी धुकधुकी
कैबिनेट विस्तार और संगठन गठन पर होगा मंथन
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 12 फरवरी को कैबिनेट बैठक बुलाई है। उससे पहले आज कुछ देर बाद दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। इस दौरे को प्रदेश की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस दौरान पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर मंत्रिमंडल विस्तार और कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन को लेकर गहन चर्चा करेंगे।
प्रदेश में सुक्खू कैबिनेट का एक मंत्री पद लंबे समय से खाली चल रहा है। ऐसे में बजट सत्र से पहले इस पद को भरने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सिर्फ नए मंत्री की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और एक सीनियर मंत्री को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने जैसे बड़े फैसले भी हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अगर कैबिनेट विस्तार के साथ किसी सीनियर मंत्री को ड्रॉप किया जाता है तो वह शिमला संसदीय क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल शिमला संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में मजबूत स्थिति में माना जा रहा है।
ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए हाईकमान इस दिशा में फैसला ले सकता है। हालांकि, किसी मंत्री को हटाने या बनाए रखने का अंतिम निर्णय पूरी तरह पार्टी हाईकमान के हाथ में है।
कैबिनेट में खाली पद को लेकर कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है। मौजूदा सरकार में कुल्लू जिला से कोई भी कैबिनेट मंत्री नहीं है, जिसे लेकर लंबे समय से क्षेत्रीय असंतुलन की चर्चा होती रही है। ऐसे में सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार मंडी संसदीय क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व दे सकती है।
सुंदर सिंह ठाकुर पहले मुख्य संसदीय सचिव (CPS) के तौर पर सरकार में जिम्मेदारी निभा चुके हैं और संगठन में भी उनकी पकड़ मानी जाती है। अगर उन्हें मंत्री बनाया जाता है तो मंडी संसदीय क्षेत्र को कैबिनेट में एक अतिरिक्त प्रभावी चेहरा मिलेगा। हालांकि, राजस्व मंत्री जगत नेगी भी मंडी संसदीय क्षेत्र से ही आते हैं, लेकिन वे ट्राइबल कोटे से मंत्री हैं, इसलिए सामान्य कोटे में मंडी का प्रतिनिधित्व अब भी सीमित माना जा रहा है।
अगर कैबिनेट से किसी सीनियर मंत्री को हटाया जाता है, तो मंत्रिमंडल में दो पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में ज्वालाजी से विधायक संजय रत्न और पालमपुर से विधायक आशीष बुटेल में से किसी एक को मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। दोनों नेता संगठन और सरकार के भीतर सक्रिय माने जाते हैं और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी उनके नाम अहम हैं।
इसके अलावा CM सुक्खू के करीबी माने जाने वाले संजय अवस्थी का नाम भी चर्चाओं में है। हालांकि, अगर उन्हें मंत्री बनाया जाता है तो शिमला संसदीय क्षेत्र का वर्चस्व एक बार फिर बढ़ जाएगा, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण उनके नाम पर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
CM सुक्खू का यह दिल्ली दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस संगठन का गठन भी लंबे समय से लंबित है। कैबिनेट विस्तार और संगठन के गठन को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
माना जा रहा है कि हाईकमान प्रदेश में आगामी राजनीतिक रणनीति और सरकार की दिशा तय करने के लिए बड़े फैसले ले सकता है। अब सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं। यह साफ है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा हिमाचल की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकता है और आने वाले दिनों में सरकार व संगठन दोनों के चेहरों में बदलाव देखने को मिल सकता है।