#राजनीति
January 15, 2026
CM सुक्खू ने केन्द्रीय वित्तमंत्री से मांगा 50 हजार करोड़ ग्रीन फंड, कर्ज सीमा बढ़ाने का भी किया आग्रह
सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार पर जताया भरोसा
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नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और लगातार बढ़ती चुनौतियों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखा है। नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष वित्तीय सहायता और नीतिगत सहयोग की मांग की। इस बैठक को राज्य की आर्थिक सेहत के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से पर्वतीय राज्यों के लिए अलग से 50 हजार करोड़ रुपये का ‘ग्रीन फंड’ गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश को बड़ा योगदान देते हैं,
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लेकिन प्राकृतिक आपदाओं का सबसे ज्यादा नुकसान भी इन्हीं राज्यों को उठाना पड़ता है। ऐसे में ग्रीन फंड से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन और सतत विकास को भी मजबूती मिलेगी।
सीएम सुक्खू ने राज्य के राजस्व घाटा अनुदान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान सुनिश्चित किया जाए,
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ताकि राज्य अपनी बुनियादी सेवाओं, सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों को सुचारू रूप से चला सके। इसके साथ ही उन्होंने 16वें वित्त आयोग से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की और हिमालयी राज्यों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से कर्ज सीमा बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव पड़ा है। आपदा राहत, पुनर्निर्माण और आधारभूत ढांचे की बहाली में बड़े पैमाने पर संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके लिए अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन जरूरी है।
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सीएम सुक्खू ने यह भी कहा कि आपदा जोखिम सूचकांक तैयार करते समय हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक संवेदनशीलता, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं को विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इससे केंद्र से मिलने वाली सहायता अधिक न्यायसंगत और व्यावहारिक हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद भरोसा जताया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश की समस्याओं को गंभीरता से समझेगी और राज्य को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। यह मुलाकात राज्य के भविष्य की आर्थिक रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।